लखनऊ, 18 जनवरी (हि.स.)। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में सप्त ऋषियों के नाम पर लखनऊ में संचालित बाल संस्कारशालाओं के विद्यार्थियों का वार्षिक परीक्षा-आधारित पुरस्कार वितरण समारोह रविवार को सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम वशिष्ठ बाल संस्कारशाला, प्रीतिनगर, लखनऊ में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक एवं गायत्री परिवार के परिजन उपस्थित रहे।
समारोह में सभी बाल संस्कारशालाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। प्रथम पुरस्कार वशिष्ठ बाल संस्कारशाला के मृत्युंजय मणि मिश्रा, द्वितीय पुरस्कार विश्वामित्र बाल संस्कारशाला के वंश, जबकि तृतीय पुरस्कार अनन्या एवं माही को प्रदान किया गया। पुरस्कार प्राप्त करते समय बच्चों के उत्साह और आत्मविश्वास ने उपस्थित जनसमूह को भाव विभोर कर दिया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए गायत्री परिवार के वरिष्ठ परिजन के. बी. सिंह एवं निष्ठा रस्तोगी ने बच्चों को अपना स्नेहाशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि संस्कार ही मानव जीवन की आधारशिला होते हैं और बाल्यावस्था में दिए गए नैतिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक संस्कार जीवन भर व्यक्ति का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने बाल संस्कारशालाओं को समाज में चरित्रवान, अनुशासित और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार करने का सशक्त माध्यम बताया।
समारोह के दौरान लखनऊ में संचालित सभी बाल संस्कारशालाओं के संचालकों को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संस्कारशालाओं द्वारा किए जा रहे शैक्षिक, नैतिक एवं सांस्कृतिक प्रयासों की सराहना की गई और उनके सतत योगदान को समाज के लिए अत्यंत उपयोगी बताया गया।
कार्यक्रम का संचालन इंद्रेश मिश्रा ने किया। उन्होंने अंत में उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं बच्चों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें श्रेष्ठ संस्कारों के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। समारोह सौहार्द, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना के वातावरण में सम्पन्न हुआ, जिसने यह संदेश दिया कि संस्कारयुक्त शिक्षा ही सशक्त समाज और उज्ज्वल राष्ट्र की कुंजी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Harsh Gautam
