पूर्वी सिंहभूम, 19 जनवरी (हि.स.)।
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर सोमवार को लौहनगरी जमशेदपुर में क्षत्रिय करणी सेना ने ‘शौर्य दिवस’ के रूप में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया।
मरीन ड्राइव स्थित महाराणा प्रताप चौक पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर युवाओं ने महाराणा के आदर्शों—स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति और अटूट संघर्ष—पर चलने का सामूहिक संकल्प लिया, जो आज के दौर में प्रासंगिक बना हुआ है।कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे मरीन ड्राइव चौक पर हुई, जहां गाजे-बाजे के साथ ‘महाराणा प्रताप अमर रहें’, ‘जय भवानी’ और ‘भारत माता की जय’ के उद्घोषों से पूरा इलाका गूंज उठा।
क्षत्रिय करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अभिनव सिंह राठौड़ ने मुख्य वक्तव्य देते हुए महाराणा प्रताप के जीवन की विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने बताया कि 1540 में जन्मे महाराणा ने 1572 से 1597 तक अकबर की विशाल मुगल सेना के खिलाफ हल्दीघाटी युद्ध सहित 20 से अधिक लड़ाइयां लड़ीं, लेकिन कभी अधीनता स्वीकार नहीं की। उदयपुर के सुदृढ़ महलों को छोड़कर जंगलों में घास की रोटियां खाकर जीवन व्यतीत किया, जो उनकी त्यागमयी वीरता का प्रतीक है। सिंह ने युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया के भटकाव से बचकर धैर्य, अनुशासन और मातृभूमि रक्षा के लिए तैयार रहें।राष्ट्रप्रेम को मजबूत करने का संकल्पवक्ताओं ने जोर देकर कहा कि महाराणा प्रताप का शौर्य केवल इतिहास तक सीमित नहीं, बल्कि यह हर भारतीय के रगों में दौड़ता है। कार्यक्रम में करणी सेना ने समाज में एकता, वीरता और राष्ट्रप्रेम के प्रसार के लिए निरंतर अभियान चलाने का ऐलान किया।
जिला अध्यक्ष राजेश सिंह ने बताया कि संगठन स्कूलों-कॉलेजों में महाराणा की गाथाओं पर आधारित वर्कशॉप आयोजित करेगा, ताकि नई पीढ़ी उनके बलिदान से प्रेरित हो।इस शौर्य दिवस में प्रदेश और जिला स्तर के दर्जनों पदाधिकारी, युवा कार्यकर्ता और स्थानीय निवासी शामिल हुए। करणी सेना ने घोषणा की कि यह परंपरा हर वर्ष धूमधाम से जारी रखी जाएगी, ताकि महाराणा प्रताप की वीर गाथाएं जन-जन तक पहुंचें।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक
