कोलकाता, 19 जनवरी (हि.स.)। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल, विशेषकर राजधानी कोलकाता में बढ़ते प्रदूषण को गंभीरता से लेते हुए सोमवार को स्वतः संज्ञान लिया। मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मुद्दे पर एक स्वतः जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने प्रदूषण से संबंधित पहले से दायर दो अन्य जनहित याचिकाओं को संलग्न करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को निर्धारित की गई है। अदालत ने पूर्व में दायर जनहित याचिकाओं से जुड़े सभी पक्षों को उस दिन उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से नोटिस प्राप्त होने की पुष्टि की है लेकिन राज्य सरकार ने इस पर अभी तक काेई जवाब नहीं दिया है।
उच्च न्यायालय ने यह संज्ञान वर्तमान शीतकालीन मौसम के दौरान कोलकाता में लगातार गिरते वायु गुणवत्ता स्तर और बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर लिया है। इस सर्दी के मौसम में कई दिनों तक कोलकाता का वायु गुणवत्ता स्तर दिल्ली से भी अधिक खराब दर्ज किया गया।
हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 के दौरान कोलकाता की वायु गुणवत्ता केवल सूक्ष्म कणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जहरीली गैसीय प्रदूषकों से भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई। इनमें नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सतही ओजोन जैसे तत्व प्रमुख रहे।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 82 दिनों तक कोलकाता का वायु गुणवत्ता स्तर मुख्य रूप से इन जहरीली गैसीय प्रदूषकों के कारण खराब रहा। यह विश्लेषण जलवायु तकनीक क्षेत्र की एक संस्था द्वारा तैयार किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यद्यपि सूक्ष्म कण अब भी एक बड़ी चिंता बने हुए हैं, लेकिन आंकड़े यह संकेत देते हैं कि कोलकाता में वायु विषाक्तता अब बहु-प्रदूषक स्वरूप ले चुकी है, जिसमें गैसीय उत्सर्जन दैनिक स्वास्थ्य जोखिम तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।——————-
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
