महोबा, 19 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद में सोमवार को संत ओशो के 36वें परिनिर्वाण दिवस पर ओशो प्रेमियों ने गोरखगिरि पर्वत पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। हास्य व सक्रिय ध्यान कर ओशो को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री से ओशो की मृत्यु की अनसुलझी गुत्थी को सुलझाने के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाने की मांग की।
बुंदेली समाज के संयोजक संत ओशो के अनुयायी तारा पाटकर ने कहा कि ओशो की मृत्यु से पर्दा कब उठेगा। इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण बात क्या होगी कि 35 साल बीत जाने के बाद भी ओशो की विवादास्पद मृत्यु का रहस्य नहीं सुलझा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस संबंध में पिछले पांच वर्ष से लगातार खत लिख रहे हैं। भारत के जिस आध्यात्मिक गुरु ने ध्यान की 113 विधियां खोजकर पूरे पश्चिम जगत को हिला दिया, उसकी मृत्यु पर सरकारें खामोश क्यों हैं।
बताया कि ओशो के शिष्य शुरू से मांग उठा रहे हैं लेकिन महाराष्ट्र की सरकारों ने अब तक ओशो की मृत्यु की जांच के लिए कमेटी तक नहीं बनायी। इससे ओशो के अनुयायी आहत है और कहा कि ओशो के शिष्य योगेश ठक्कर ने मुंबई हाईकोर्ट में ओशो की वसीयत विवाद पर जनहित याचिका दायर की लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। इस मौके पर लोगों ने अपने अपने विचार रखे। श्रद्धांजलि सभा में डा. देवेन्द्र, प्रहलाद, अन्नू पुरवार, अवधेश गुप्ता, प्रेम, प्रवीण चौरसिया, गया प्रसाद, विपिन भाखरी, कुक्कू शिवहरे, विकास, मुन्ना, मंटू सोनी व राजेश शुक्ला आदि मौजूद रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उपेन्द्र द्विवेदी
