जौनपुर, 24 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में यूजीसी द्वारा प्रस्तावित नए कानून “उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा”–2026” के विरोध में शनिवार को धर्म रक्षा आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। संगठन ने इस कानून को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसे सामाजिक समरसता और संविधान की मूल भावना के खिलाफ करार दिया तथा तत्काल वापस लेने की मांग की। पत्रकारों से बातचीत करते हुए संगठन के संयोजक चंद्रमणि पाण्डेय ने कहा कि यह कानून देश और समाज के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून जाति के आधार पर शैक्षणिक संस्थानों को एकपक्षीय और असीमित अधिकार देता है, जिसका दुरुपयोग सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि कानून की सबसे बड़ी खामी यह है कि आरोप लगाने वाले को सामने आकर आरोप सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है और झूठा आरोप सिद्ध होने पर भी कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं किया गया है। यह भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त समान अवसर के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। ऐसे प्रावधानों से शैक्षणिक संस्थानों में आपसी वैमनस्यता और जातिवादी संघर्ष को बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से योगेश द्विवेदी, विकास पाण्डेय, विपिन पाण्डेय, शैलेन्द्र प्रजापति, गिरिजेश दुब, सूर्य भूषण त्रिपाठी, सत्य प्रकाश पाण्डेय, सत्य प्रकाश दुबे, उदय प्रताप सिंह और छोटेलाल यादव सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

