जम्मू, 25 जनवरी (हि.स.)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) द्वारा शुरू किए गए ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान के तहत जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष रमन भल्ला ने रविवार को पंचायत अर्निया कूल में एक जनसभा को संबोधित किया। यह कार्यक्रम जिला जम्मू ग्रामीण कमेटी की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने के फैसले के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया गया।

सभा को संबोधित करते हुए रमन भल्ला ने कहा कि मनरेगा केवल एक कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के गरीब और कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा की मजबूत ढाल है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक कानून की पहचान को कमजोर करना या इसका नाम बदलना गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला है। भल्ला ने कहा कि महात्मा गांधी का नाम सत्य, न्याय और वंचितों के सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ है और इसे हटाने की कोशिश समावेशी विकास की मूल भावना को मिटाने का प्रयास है।
रमन भल्ला ने जम्मू-कश्मीर में बढ़ती बेरोजगारी, विशेषकर युवाओं के बीच नौकरी के अवसरों की कमी और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी दावों के विपरीत जमीनी हकीकत यह है कि पढ़े-लिखे युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं और इससे उनमें निराशा बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से स्थायी रोजगार सृजन के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की।
उन्होंने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बिगड़ती बुनियादी सुविधाओं का भी मुद्दा उठाया। भल्ला ने कहा कि लोग पेयजल संकट, अनियमित बिजली आपूर्ति, खराब सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। बढ़ती महंगाई, ईंधन और जरूरी वस्तुओं की कीमतों ने आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। उन्होंने कहा कि नाम बदलने जैसे प्रतीकात्मक कदमों के बजाय सरकार को इन वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
कार्यक्रम में जिला जम्मू ग्रामीण अध्यक्ष नीरज कुंदन ने भी कांग्रेस नेतृत्व के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि मनरेगा ने जम्मू जिले के ग्रामीण परिवारों को रोजगार सुरक्षा प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने सरकार से योजना के नाम में बदलाव की किसी भी कोशिश को तुरंत वापस लेने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा
