वाराणसी, 26 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में सोमवार को शंकराचार्य घाट पर वेदपाठी बटुकों ने पूरे उत्साह के साथ गणतंत्र दिवस मनाया। जगद्गुरुकुलम के छात्रों ने खुद को ही तिरंगे के रूप में परिवर्तित कर लिया।
घाट पर ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और ध्वज का पूजन कर ध्वजोत्तोलन किया गया। ध्वजारोहण कर रमेश उपाध्याय ने कहा कि राष्ट्र व सनातन धर्म की रक्षा चारों शंकराचार्य महाराज ही कर सकते हैं। गौमाता की रक्षा ही सनातन धर्म की रक्षा है। इसके लिए सभी लोगों को एकजुट होना चाहिए।
इस दौरान ब्रम्हचारी परमात्मानंद ने कहा कि गणतंत्र दिवस चिंतन करने के लिए है, कि जिस स्वतंत्र भारत के स्वरूप की कल्पना स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने किया था। क्या भारत उस मार्ग पर है? हमें हमारे राष्ट्र के परम्परा व नैतिक मूल्यों के स्थापना के लिए सतत् प्रयत्नशील होना होगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम में अंकिता पटेल ने वंदेमातरम, राष्ट्रगीत और गंगा गीत गाया। अन्य बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की ।
श्री विद्यामठ के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि पूर्व में ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पावन सान्निध्य में दशाश्वेध घाट पर स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत के इतिहास का सबसे बड़ा झंडा फहराकर कीर्तिमान स्थापित किया था। और गंगा तट पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम को गंगा तिरंगा का नाम दिया गया था। तब से लगातार काशी में गंगा तिरंगा कार्यक्रम तिथि के अनुसार हर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को मनाया जाता है। कार्यक्रम में हजारी कीर्ति नारायण शुक्ला, सतीश अग्रहरि आदि के अलावा बटुकों ने भी बड़ी संख्या में भागीदारी की।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी
