बेंगलुरु, 27 जनवरी (हि.स.)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्र सरकार वीबीजी रामजी (विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन–ग्रामीण) अधिनियम को निरस्त कर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को पुनः बहाल नहीं करती, तब तक यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ एवं ‘राजभवन चलो’ विशाल विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के माध्यम से गरीबों को प्राप्त संवैधानिक रोजगार के अधिकार को छीन लिया है।

उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना के तहत महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, दिव्यांगों सहित ग्रामीण गरीबों को प्रति वर्ष 100 दिनों के रोजगार की गारंटी प्राप्त थी। किंतु नए कानून के माध्यम से ग्रामसभा और पंचायतों के अधिकारों को समाप्त कर, गरीबों के रोजगार संबंधी निर्णय दिल्ली में लिए जाने की व्यवस्था लागू कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने मनरेगा, खाद्य अधिकार, शिक्षा का अधिकार और सूचना का अधिकार जैसे जनहितैषी कानून लागू किए थे। उन्होंने दावा किया कि गरीबों, महिलाओं, दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा केवल कांग्रेस पार्टी ने की है।
सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि वीबीजी रामजी के माध्यम से समाज में असमानता को स्थायी रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा-आरएसएस का उद्देश्य गरीबों को सदैव अधीनस्थ बनाकर रखना है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा विशेष विधानसभा सत्र में मनरेगा की समाप्ति पर चर्चा की अनुमति नहीं दे रही है, बावजूद इसके राज्य सरकार इस विषय पर स्पष्ट निर्णय लेगी। उन्होंने घोषणा की कि राज्यभर में पदयात्रा के माध्यम से आंदोलन जारी रखा जाएगा। साथ ही आगामी बजट में 6,000 ग्राम पंचायत कार्यालयों को महात्मा गांधी का नाम देने की घोषणा भी की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश महादेवप्पा
