कोलकाता, 27 जनवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव से पहले तनाव और हिंसा फैलाने की संभावित कोशिशों को लेकर मंगलवार को लोगों को सतर्क किया। उन्होंने इशारों-इशारों में कुछ ऐसे वर्गों का उल्लेख किया, जिनकी गतिविधियां राज्य में अशांति का माहौल बना सकती हैं, हालांकि उन्होंने किसी का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में दंगा जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा सकती है, जिससे सभी को सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां एक समुदाय की आबादी 30 प्रतिशत से अधिक है। जब कोई शिकायत होती है, तो वे सड़क जाम करते हैं। राज्य की लगभग 26 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति की है और करीब छह प्रतिशत आदिवासी समुदाय से है। किसी घटना के बाद आदिवासी समुदाय के लोग ट्रेन सेवाएं रोक देते हैं। मैं ऐसा नहीं चाहती। मैं चाहती हूं कि सभी लोग मिल-जुलकर रहें।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा कि शांति और सौहार्द सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर जीवन में शांति होगी तो प्रगति होगी। माहौल शांत रहेगा तो काम करना भी आसान हो जाता है।
मुख्यमंत्री ने एक बार फिर अन्य राज्यों, खासकर भाजपा शासित राज्यों में काम करने वाले पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों पर कथित हमलों और अपमान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि करीब 1.5 करोड़ प्रवासी मजदूर पश्चिम बंगाल में हैं और यहां उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होती। लेकिन जब हमारे राज्य के मजदूर रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं, तो उन पर हमले होते हैं।
मुख्यमंत्री ने बाहर काम कर रहे बंगाल के प्रवासी मजदूरों से राज्य में लौटने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार उनके रोजगार और आजीविका की पूरी जिम्मेदारी लेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
