-फसलों के लिए अमृत वर्षा, 4.2 मिलीमीटर गिरा पानी

ग्वालियर, २7 जनवरी (हि.स.)। महीना तो माघ का है लेकिन दृश्य चौमासे जैसा है। मंगलवार को दोपहर से शुरू हुई बारिश ने देर रात तक रुकने का नाम नहीं लिया। किसानों को भी मावठ का इंतजार था और इंतजार की यह घड़ी आज उस समय समाप्त हो गई जब दोपहर में अचानक बादल बरसने लगे। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि बारिश का क्रम आज देर रात भर जारी रह सकता है जबकि बुधवार और गुरुवार को सुबह घना कोहरा देखने को मिल सकता है। शुक्रवार व शनिवार को मौसम शुष्क रहेगा लेकिन रविवार 31 जनवरी से दो फरवरी तक एक बार फिर बारिश होने की संभावना है। इधर कृषि वैज्ञानिक आज हुई बारिश को रबी मौसम की सभी फसलों के लिए अमृत वर्षा बता रहे हैं।

आज सुबह से ही आसमान में बादल थे लेकिन बादलों का घनत्व कम होने से सूरज के दर्शन भी हुए लेकिन लगभग साढ़े दस बजे के बाद बादलों का घनत्व बढ़ा तो फिर पूरे दिन सूरज के दर्शन नहीं हुए। दोपहर साढ़े 12 बजे के आसपास बादल लगभग 10 मिनट तक बूंदाबांदी कर शांत हो गए। मध्यान्ह दो बजे के बाद मौसम ने एक बार फिर करवट बदली और तेज हवा चलने लगी। लगभग ढाई बजे से तेज बारिश शुरू हो गई। इसके बाद रुक-रुककर देर रात क बारिश का क्रम जारी रहा। इस दौरान गरज-चमक के साथ कभी हल्की तो कभी तेज बारिश हुई। शाम साढ़े पांच बजे तक शहर में 4.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। आज बारिश के चलते दोपहर बाद लोग घरों में कैद होकर रह गए।
स्थानीय मौसम विज्ञान केन्द्र के अनुसार पिछले दिन की तुलना में आज न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री सेल्सियस वृद्धि के साथ 11.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस अधिक है जबकि अधिकतम तापमान 2.0 डिग्री सेल्सियस गिरावट के साथ 19.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस कम है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल तापमान में ज्यादा उलटफेर की संभावना नहीं है लेकिन बारिश की वजह से ठंड का प्रकोप बढ़ सकता है।
फसलों को होगा फायदा: कृषि विज्ञान केन्द्र ग्वालियर के सेवानिवृत्त मुख्य वैज्ञानिक डॉ. राजसिंह कुशवाह ने बताया कि आज ग्वालियर शहर से लेकर विकासखंड मुरार, घाटीगांव, डबरा, भितरवार विखसखंड में भी बारिश हुई है। जिससे किसान बेहद खुश हैं क्योंकि यह बारिश रबी मौसम की सभी फसलों के लिए अमृत वर्षा के समान है। बारिश से मिट्टी में नमी बढऩे के साथ ही फसलों के पत्तों पर जमी धूल-मिट्टी साफ हो जाएगी। इससे प्रकाश संश्लेषण बढ़ेगा तो पौधों की ग्रोथ अच्छी होगी। जिससे फसल उत्पादन बढ़ेगा। इसके अलावा इस समय ज्यादातर फसलों को पानी की जरूरत थी। ऐसे में बारिश हो जाने से सिंचाई पर खर्च होने वाला पानी, मानव श्रम, बिजली, डीजल आदि की भी बचत हुई है।
हिन्दुस्थान समाचार/शरद
हिन्दुस्थान समाचार / शरद शर्मा
