

डिंडीगुल, 28 जनवरी (हि.स.)। तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के नत्तम स्थित कावड़ी मठ में बुधवार तड़के नगराथार समुदाय द्वारा 420 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक कावड़ी यात्रा की परंपरा का भव्य और श्रद्धापूर्ण निर्वहन किया गया। इस अवसर पर समुदाय की कुल 352 कावड़ियां नत्तम पहुंचीं, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालु भगवान मुरुगन की नगरी पलानी की ओर रवाना हुए।
नत्तम मारियम्मन मंदिर के समीप स्थित कावड़ी मठ में कावड़ियों के आगमन पर तड़के महेश्वर पूजा संपन्न कराई गई। इस दौरान कावड़ी सिंधु गीतों का भावपूर्ण गायन हुआ तथा पारंपरिक कावड़ी नृत्य प्रस्तुत किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के उपरांत श्रद्धालु श्रद्धा और उल्लास के साथ पलानी की ओर प्रस्थान कर गए।
कावड़ी यात्रा के नत्तम मारियम्मन मंदिर से रवाना होते ही पूरे मार्ग में स्थानीय जनता द्वारा पुष्पवर्षा, जल सेवा और अन्य सेवा कार्यों के माध्यम से भव्य स्वागत किया गया। यात्रा मार्ग में अनेक स्थानों पर अन्नदान का आयोजन किया गया, जिसे नगराथार समुदाय की सेवा, त्याग और भक्ति की विशिष्ट पहचान माना जाता है।
दरअसल, शक्कर कावड़ी के साथ हज़ारों श्रद्धालु 26 जनवरी को कुंदरकुड़ी से 21 दिनों की कठिन पदयात्रा पर निकले थे। यह यात्रा नत्तम मार्ग होते हुए पलानी तक जाती है। नगराथार समुदाय के श्रद्धालु पीढ़ियों से इस पदयात्रा को कठोर अनुशासन, संयम और पूर्ण आस्था के साथ संपन्न करते आ रहे हैं।
इस वर्ष श्रद्धालु 01 फरवरी को थाई पूसम के पावन अवसर पर पलानी पहुंचेंगे। इसके बाद 03 फरवरी को मघा नक्षत्र के दिन पर्वत मंदिर में विधिवत कावड़ी अर्पण करेंगे तथा विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। पूजा संपन्न होने के बाद श्रद्धालु पैदल ही अपने-अपने घरों की ओर लौटेंगे, जो नगराथार समुदाय की एक विशिष्ट और कठोर परंपरा मानी जाती है।
बदलते समय और आधुनिक सुविधाओं के बावजूद नगराथार समुदाय आज भी अपने पूर्वजों द्वारा निर्धारित मार्ग और नियमों का अक्षरशः पालन करता है। ऊपरी वस्त्र धारण किए बिना, संन्यासी जीवन-शैली अपनाकर, जहाँ स्थान मिले वहीं भोजन करना और सड़क किनारे विश्राम करना—यह कावड़ी यात्रा उनकी अटूट आस्था, त्याग और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक बनी हुई है।————
हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV
