शिवपुरी, 28 जनवरी (हि.स.)।
मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की करैरा तहसील में बुधवार की रात अचानक ओलों की बारिश से फसलें बर्बाद हो गई, कल तक जिन खेतों को देखकर किसान अपनी बेटी की शादी और कर्ज से मुक्ति के सपने बुन रहा था, आज वही खेत सफेद कफन ओढ़े नजर आ रहे हैं।
करैरा क्षेत्र में बुधवार को प्रकृति ने ऐसा तांडव मचाया कि मिनटों में अन्नदाता की साल भर की मेहनत ओलों के कारण मिट्टी में मिल गई।
करैरा क्षेत्र के टकटकी, कड़ोरा लोधी, चिरली, नंदपुर और मछावली सहित करीब 50 गांवों में आसमान से गिरे ‘सफेद पत्थरों’ ने फसलों को लहूलुहान कर दिया। सरसों और गेहूं की फसलें टूटकर बिखर गईं, चने के पौधे उजड़ कर खेत में बिछ गए।
बर्बाद फसल देख सिसकता अन्नदाता:-
खेतों के किनारे खड़े किसान बेबसी में आसमान की ओर ताक रहे हैं।
ग्राम चिनोद,टकटकी, टीला, जुझाई जैसे गांवों से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे विचलित करने वाली हैं। एक किसान ने रुंधे गले से कहा, साहब, ये सिर्फ फसल नहीं गिरी, हमारी कमर टूट गई है। अब न बच्चों की फीस भरी जाएगी, न साहूकार का कर्ज चुकेगा।
प्रशासन की सुस्ती बनाम किसानों की उम्मीद:-
फिलहाल एक दर्जन से अधिक गांवों (जैसे सिल्लारपुर, वनगवां, कारोठा, बगरौदा) में सन्नाटा पसरा है। अब किसानों की आखिरी उम्मीद सरकार के सर्वे और मुआवजे पर टिकी है। शिवपुरी जिला प्रशासन और राजस्व विभाग को अब युद्धस्तर पर गिरदावरी करनी होगी, क्योंकि ओलों के कारण खेतों में बिखरी फसलें देख किसानों के आंसू रोके नहीं रुक रहे हैं।
करेरा तहसीलदार कल्पना शर्मा का कहना है कि हमारे द्वारा आर आई और पटवारियों की टीम ओला प्रभावित ग्रामों में भेजी हैं जो शीघ्र ही सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी, जिसके आधार पर आंगे की कार्यवाही की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / युगल किशोर शर्मा
