सुलतानपुर, 28 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में जिला सुलतानपुर में बुधवार को राष्ट्रीय सवर्ण परिषद ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट प्रीति जैन को एक मांग पत्र सौंपा, जिसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एक नए कानून को वापस लेने की मांग की गई।
राष्ट्रीय संगठन मंत्री आचार्य भरत तिवारी ने कहा कि यदि ऐसे कानून लागू होते रहे, तो सवर्ण छात्रों पर अनगिनत मुकदमे होंगे और उनकी सुरक्षा के लिए कोई कानून नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में छात्र या तो आत्महत्या करने या देश छोड़ने पर मजबूर होंगे, क्योंकि यह कानून शिक्षा, योग्यता और प्रतिभा को सीधे प्रभावित करेगा।
आरोप है कि यह कानून एक वर्ग विशेष के छात्रों को बिना किसी दोष के अपराधी घोषित करता है। उन्होंने आशंका व्यक्त की, कि इससे सामान्य वर्ग के बच्चों के प्रति पक्षपात होगा और झूठी शिकायतें बढ़ेंगी। परिषद ने तर्क दिया कि देश को जातीय कानून या जातीय संरक्षण की नहीं, बल्कि एक सुखी, समृद्ध और समतामूलक समाज के निर्माण की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे जातीय कानून देश में जातीय संघर्ष और हिंसा को बढ़ावा देंगे, जिससे देश गृह युद्ध की ओर धकेला जा सकता है।
संगठन ने अपनी मांग में कहा कि ऐसी नीतियां देश की संस्कृति, सभ्यता, एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं।
उन्होंने आशा व्यक्त किया कि, देश की एकता, अखंडता और समाज की शांति व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए, सरकार और यूजीसी इस कानून को तत्काल समाप्त करने के दिशा-निर्देश जारी करेंगे। इस प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष अमित उपाध्याय, जिला प्रवक्ता मोहम्मद अली और अतुल तिवारी सहित अन्य कई सदस्य मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / दयाशंकर गुप्त
