सीवर की सफाई के दौरान हुई दो सफाई कर्मचारियों की मौत मामले में
जताई नाराजगी
हांसी, 28 जनवरी (हि.स.)। हांसी में राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित एक होटल में
पिछले वर्ष 18 अक्टूबर को (धनतेरस के दिन) सीवर सफाई के दौरान दो व्यक्तियों की मौत
के मामले में हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे मानवाधिकारों का
गंभीर उल्लंघन करार दिया है। आयोग ने बुधवार काे जारी आदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस अमानवीय घटना
के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय किए बिना मामले को किसी भी सूरत में दबाने नहीं
दिया जाएगा। हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने स्पष्ट किया कि मृतकों के परिजनों को
30-30 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना न्याय की पूर्ति नहीं है।
सीवर लाइन की सफाई के दौरान दो निर्दोष व्यक्तियों की दर्दनाक मौत के मामले
में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने बुधवार काे पुलिस जांच पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे गंभीर रूप
से पक्षपातपूर्ण, संदिग्ध और वास्तविक दोषियों को कानून के कठोर प्रावधानों से बचाने
के उद्देश्य से की गई कार्रवाई करार दिया है। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि
जांच की दिशा तथा रिकॉर्ड पर प्रस्तुत दस्तावेज स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि वास्तविक
दोषियों को बचाने के लिए एक जानबूझकर और सुनियोजित प्रयास किया गया है।
अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा तथा दोनों सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया को
मिलाकर बने पूर्ण आयोग ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर कड़ी टिप्पणी करते हुए
कहा कि होटल के तथाकथित सहायक प्रबंधक का बिना तिथि का नियुक्ति पत्र न केवल संदेह
पैदा करता है, बल्कि यह स्पष्ट संकेत देता है कि घटना के बाद जल्दबाजी में ऐसा दस्तावेज
तैयार कर होटल मालिक की जवाबदेही से बचने का रास्ता बनाया गया। आयोग ने इसे कानून और
नैतिकता दोनों के साथ खिलवाड़ बताया।
आयोग ने यह भी गंभीर आपत्ति जताई उप जिला अटॉर्नी द्वारा बिना किसी ठोस कारण
के 13 नवंबर को दी गई कानूनी राय, जिसके माध्यम से अपराध को धारा 105 बीएनएस से धारा
106 बीएनएस में परिवर्तित कर उसका स्वरूप हल्का किया गया, स्वयं उस कानूनी राय पर गंभीर
प्रश्नचिह्न लगाती है। इससे पुलिस जांच एजेंसी की दुर्भावना पूर्ण मंशा एवं मंसूबों
का संकेत मिलता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस ललित बत्रा
की अध्यक्षता वाले पूर्ण आयोग ने पुलिस अधीक्षक, हांसी को निर्देश दिया है कि वे पूरे
प्रकरण की पुनः जांच करें और अगली सुनवाई 18 फरवरी से एक सप्ताह पूर्व विस्तृत जांच
रिपोर्ट प्रस्तुत करें। आयोग ने निर्देश दिए कि अगली सुनवाई पर स्वयं व्यक्तिगत रूप
से आयोग के समक्ष उपस्थित हों। इसके साथ ही प्रारंभिक जांच करने वाले उप पुलिस अधीक्षक
और विवादित विधिक राय देने वाले उप जिला अटॉर्नी को भी आयोग के समक्ष तलब किया गया
है। आयोग ने नगर परिषद या ग्राम पंचायत और होटल प्रबंधन द्वारा अब तक रिपोर्ट न देने
को घोर लापरवाही बताते हुए सख्त शब्दों में चेताया है कि आदेशों की अवहेलना को गंभीरता
से लिया जाएगा।
हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने कहा कि मृतकों के परिजनों को 30-30 लाख रुपये
का मुआवजा दिया जाना न्याय की पूर्ति नहीं है, बल्कि वास्तविक दोषियों को कानून के
कटघरे में लाना अनिवार्य है। आयोग ने दोहराया कि मानव जीवन की कीमत कागजी औपचारिकताओं
से नहीं चुकाई जा सकती।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर
