दक्षिण 24 परगना, 29 जनवरी (हि. स.)। सुंदरबन के जंगल में रॉयल बंगाल टाइगर से जीवन-मृत्यु की जंग लड़कर एक मछुआरा बाल-बाल बच गया। बाघ के हमले में गंभीर रूप से घायल मछुआरे का फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना के बाद अन्य मछुआरों में दहशत का माहौल है।

घायल मछुआरे की पहचान पाथरप्रतिमा के गोबर्धनपुर कोस्टल थाना क्षेत्र के जी-प्लॉट ग्राम पंचायत अंतर्गत सत्यदासपुर निवासी बिनु भक्त (32) के रूप में हुई है।

मिली जानकारी के अनुसार, वह 12 अन्य मछुआरों के साथ सुंदरबन के खाड़ी इलाके में मछली और केकड़ा पकड़ने गया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह कोलस द्वीप के पास विजयवाड़ा जंगल से सटे खाड़ी क्षेत्र में सभी मछुआरे नदी किनारे पैदल चल रहे थे। तभी अचानक जंगल से निकलकर एक रॉयल बंगाल टाइगर ने उन पर हमला कर दिया। बाघ ने सीधे बिनु भक्त को निशाना बनाते हुए उस पर झपट्टा मारा और जंगल की ओर घसीटने की कोशिश की। बाघ के पंजों और दांतों से बिनु के शरीर के कई हिस्सों में गहरे घाव हो गए और खून बहने लगा। हालात की गंभीरता को समझते हुए बिनु ने हार न मानते हुए जान बचाने के लिए संघर्ष शुरू कर दिया। इस दौरान अन्य मछुआरे भी केकड़ा पकड़ने के औजार और लाठियों के सहारे बाघ पर टूट पड़े।
लगातार लाठी से किए गए प्रहार के बाद आखिरकार रॉयल बंगाल टाइगर शिकार छोड़कर जंगल के भीतर भाग गया। घटना के बाद बिनु को गंभीर हालत में नाव से पाथरप्रतिमा लाया गया।
पहले उसे माघवनगर ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण बाद में काकद्वीप सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। फिलहाल वह वहीं इलाजरत है। बाघ के हमले से जीवित लौटे बिनु को लेकर उसके साथियों का कहना है कि साहस और सूझबूझ के कारण ही उसकी जान बच पाई।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
