प्रयागराज, 29 जनवरी, (हि.स)। माघ मेला के त्रिवेणी मार्ग स्थित श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती ने धर्म संवाद पण्डाल में गुरूवार को आयोजित सन्त सम्मेलन में कहा कि सनातन धर्म के संस्कारों का पूर्णतया सभी को अपने जीवन में पालन करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी मठ-मंदिरों, आश्रमों और सभी सनातनी को अपने घरों में कम से कम एक गाय पालनी चाहिए, क्योंकि गाय सदा से हमारे परिवार और राष्ट्र की समृद्धि का आधार रही है। अन्तर्जातीय विवाह पर कड़ाई से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। किसी भी पद्धति से सम्पन्न होने वाले विवाह में माता-पिता या अभिभावक की स्वीकृति अनिवार्य होनी चाहिए। विवाह 14-15 वर्ष में हो और कन्या की विदाई 18 वर्ष की उम्र के बाद द्विरागमन (गौना) करके करना चाहिए। हर परिवार अपने बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार के साथ ही साथ उन्हें शौर्य प्रशिक्षण अवश्य दें, जिससे वह विषम परिस्थितियों में अपनी आत्मरक्षा कर सके।शंकराचार्य ने यह भी कहा कि यूजीसी के नये नियमों से समाज में विघटन पैदा होगा और यह नियम संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकारों का उल्लंघन भी करेगा। यह न तो समाज के हित में है और न ही देश हित में है। अतः इन नियमों को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। बिन्नानी पीजी कॉलेज मीरजापुर के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर डॉ. सच्चिदानन्द तिवारी ने कहा कि देश विरोधी मैकाले शिक्षा पद्धति को समाप्त कर देश में समान शिक्षा नीति तत्काल लागू की जानी चाहिए। इसके अलावा देश में समान नागरिक संहिता व हर प्रकार के इस्लामी जिहाद के विरुद्ध भी वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये। संत सम्मेलन को स्वामी नारद आश्रम, स्वामी बृजभूषणानन्द सरस्वती, स्वामी प्रकृष्टानन्द सरस्वती, दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. वेदब्रत तिवारी, एडवोकेट मोहनलाल मिश्र सहित अन्य साधु-संन्यासियों ने भी सम्बोधित किया। संत सम्मेलन का संचालन स्वामी बृजभूषणानन्द सरस्वती ने किया। इस अवसर पर सैकड़ों दण्डी संन्यासियों सहित सनातन धर्मावलम्बी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र
