नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भारतीय कृषि क्षेत्र की एक सशक्त और लचीली तस्वीर पेश की है। सर्वेक्षण के अनुसार, कृषि क्षेत्र में हो रही निरंतर वृद्धि का मुख्य श्रेय अब केवल पारंपरिक फसलों को नहीं, बल्कि पशुधन, मत्स्य पालन और बागवानी जैसे ‘संबद्ध क्षेत्रों’ को जाता है।

पिछले 5 वर्षों में कृषि और संबद्ध क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर 4.4 प्रतिशत रही है। महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मत्स्य पालन और जलीय कृषि की दशकीय वृद्धि 8.8 प्रतिशत, पशुधन में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। यह पिछले 9 वर्षों में पशुधन क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) लगभग 195 प्रतिशत बढ़ा है। इसके अलावा, मछली उत्पादन 2014-2025 के बीच उत्पादन में 140 प्रतिशत से अधिक की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई।

भारत ने खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर अपनी स्थिति और मजबूत की है। वर्ष 2024-25 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 3,577.3 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 254.3 लाख मीट्रिक टन अधिक है। 2024-25 में बागवानी उत्पादन 362.08 मीट्रिक टन रहा, जो खाद्यान्न उत्पादन से भी अधिक है। भारत दुनिया में सूखे प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक (25 प्रतिशत) है और फल, सब्जी व आलू के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है।
वर्ष 2014-15 में शुरू किए गए ‘बीज एवं रोपण सामग्री उप-मिशन’ के तहत अब तक 6.85 लाख बीज ग्राम स्थापित किए गए और 1649.26 लाख क्विंटल गुणवत्तापूर्ण बीजों का उत्पादन हुआ, जिससे 2.85 करोड़ किसानों को लाभ मिला। संघीय बजट 2025-26 में ‘उच्च उत्पादकता वाले बीजों पर राष्ट्रीय मिशन’ की घोषणा की गई है। कृषि को मानसून की अनिश्चितता से बचाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई के लिए ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के तहत छोटे किसानों को 55 प्रतिशत और अन्य को 45 प्रतिशत तक की सब्सिडी, जो सकल सिंचित क्षेत्र 2001-02 के 41.7 प्रतिशत से बढ़कर 55.8 प्रतिशत (2022-23) हो गया है। कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन के तहत अब तक 25,689 कस्टमर हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें से 558 केंद्र केवल चालू वित्त वर्ष (अक्टूबर 2025 तक) में बनाए गए।
कृषि अवसंरचना कोष के माध्यम से अब तक 1.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई है। इससे 25 हजार से अधिक प्रोसेसिंग यूनिट्स और 17 हजार से अधिक गोदामों का निर्माण हुआ है। एफपीओ में 10 हजार किसान उत्पादक संगठनों का लक्ष्य समय से पहले ही (दिसंबर 2024 तक) पूरा कर लिया गया है। ई-नाम 31 दिसंबर 2025 तक इस डिजिटल मंच पर 1.79 करोड़ किसान, 2.72 करोड़ व्यापारी और 4698 एफपीओ पंजीकृत हो चुके हैं। यह प्लेटफॉर्म अब 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1,522 मंडियों तक फैल चुका है।
सरकार ने सभी अधिसूचित फसलों के लिए उत्पादन लागत पर करीब 50 प्रतिशत रिटर्न सुनिश्चित किया है। पीएम-किसान के तहत अब तक पात्र किसानों को 4.09 लाख करोड़ रुपये की राशि (21 किस्तों में) सीधे हस्तांतरित की गई है। वित्त वर्ष 2025 में 28.69 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण वितरित किया गया, जो तय लक्ष्य से कहीं अधिक है। किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 31 मार्च 2025 तक 7.72 करोड़ सक्रिय खाते हैं, जिन्हें 7 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर ऋण मिल रहा है।
नवाचारों की श्रेणी में आने वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश में ड्रोन और सीओआरएस तकनीक 86 हजार भूमि विवादों का समाधान, बिहार में समेकित चौड़ विकास 1933 हेक्टेयर में मछली उत्पादन शुरू, मध्य प्रदेश में सौदा पत्रक पोर्टल 1.03 लाख से अधिक सफल डिजिटल सौदे, असम सौर सिंचाई एवं नहरें सिंचित क्षेत्र में 24.28 प्रतिशत की वृद्धि और कर्नाटक में फ्रूट प्लेटफॉर्म 55 लाख किसानों का डिजिटल डेटाबेस शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्यों के ये सफल प्रयोग यह दर्शाते हैं कि केंद्र की योजनाओं के साथ मिलकर स्थानीय स्तर पर किए गए बदलाव भारतीय कृषि को ‘ग्लोबल स्टैंडर्ड’ की ओर ले जा रहे हैं। ये मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी
