जयपुर, 29 जनवरी (हि.स.)। थायराइड डिसऑर्डर आम हैं, लेकिन अक्सर वर्षों तक इनका पता नहीं चल पाता। शरीर में मौजूद यह छोटी-सी ग्रंथि मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन, ऊर्जा स्तर और शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है। जागरूकता और समय पर जांच से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल जयपुर के मधुमेह एवं हार्मोन रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज खंडेलवाल ने बताया कि इंडियन थायरॉइड सोसाइटी के अनुसार भारत में करीब 4.2 करोड़ लोग थायरॉइड डिसऑर्डर से पीड़ित हैं। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाई जाती है। कई युवा शुरुआती लक्षणों को तनाव, लंबे काम के घंटे या जीवनशैली से जुड़ी थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

कारण और जोखिम कारक में इम्यून सिस्टम से जुड़ी समस्याएं, पारिवारिक इतिहास, आयोडीन का असंतुलन, गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव, लंबे समय तक दवाओं का सेवन, रेडिएशन और महिलाओं व 35 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में अधिक जोखिम शामिल है। आम लक्षणों में लगातार थकान, बिना कारण वजन बढ़ना, अधिक ठंड लगना, सूखी त्वचा, बालों का झड़ना, पाचन धीमा होना, मूड खराब रहना और सोचने-समझने में परेशानी शामिल हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश
