उदयपुर, 29 जनवरी (हि.स.)। उदयपुर शहर के प्रतापनगर थाना क्षेत्र में बुधवार शाम एक हृदयविदारक सड़क हादसे में स्कूल छात्र की दर्दनाक मौत के बाद गुरुवार को क्षेत्र में लोगों का गुस्सा उबल पड़ा। घटना के विरोध में गुरुवार को बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और उदयपुर–डबोक एयरपोर्ट नेशनल हाईवे पर नाकोड़ा नगर–रकमपुरा मार्ग को जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

प्रदर्शन में महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल रहीं। आक्रोशित लोगों ने टायर जलाकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए प्रतापनगर थाना पुलिस का अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आशापुरा नगर निवासी 11 वर्षीय गोरांग शर्मा स्कूल की छुट्टी के बाद साइकिल से घर लौट रहा था। इसी दौरान नाकोड़ा नगर–रकमपुरा मार्ग पर सड़क पर बने गड्ढे में उसकी साइकिल फिसल गई, जिससे वह सड़क पर गिर पड़ा। उसी समय पीछे से आ रहे तेज रफ्तार मिनी ट्रक ने उसे कुचल दिया। बच्चे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि उसकी साइकिल भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। गोरांग का सिर बुरी तरह कुचला हुआ था और दृश्य बेहद भयावह था। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन मौके पर छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलते ही प्रतापनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची, मिनी ट्रक को जब्त किया और आरोपी चालक की तलाश शुरू कर दी। बच्चे का शव देखकर क्षेत्रवासी स्तब्ध रह गए। शव की हालत इतनी खराब थी कि लोग घबरा गए और लोगों का आक्रोश बढ़ गया।
गुरुवार को करीब तीन घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद पुलिस ने क्षेत्रवासियों के 7 से 8 लोगों के प्रतिनिधिमंडल को जिला प्रशासन से वार्ता के लिए भेजा। वार्ता के बाद क्षेत्रवासियों ने बताया कि मृतक बच्चे के परिजनों को 5 लाख रुपये मुआवजा देने और 7 दिन के भीतर सड़क निर्माण कार्य शुरू करने का आश्वासन दिया गया है, जिस पर प्रदर्शनकारियों ने सहमति जताई और जाम हटाया गया।
प्रदर्शन के दौरान क्षेत्रवासियों ने प्रशासन के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें हादसे में जान गंवाने वाले बच्चे के परिवार को सरकार व प्रशासन द्वारा उचित और पर्याप्त मुआवजा, नाकोड़ा नगर और आसपास की कॉलोनियों में विकास कार्यों के कारण खोदी गई सड़कों की तत्काल मरम्मत, गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदे गए गड्ढों को तुरंत भरने की मांग शामिल रहीं।
इस हादसे के बाद एक बार फिर अधूरी सड़कों और लापरवाही से किए जा रहे विकास कार्यों पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि समय रहते सड़कों की मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम किए जाते तो एक मासूम की जान नहीं जाती। मुआवजे से जान की कीमत नहीं आंकी जा सकती।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता
