
सारण, 29 जनवरी (हि.स.)। संसाधनों की कमी और जर्जर भवन के साये में जिस विभाग का अस्तित्व कभी संकट में नजर आता था वही विशेष नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई सदर अस्पताल के नवनिर्मित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य भवन में शिफ्ट होने के बाद इस यूनिट की तस्वीर और तकदीर दोनों पूरी तरह बदल गई है। नए भवन में शिफ्ट होने के साथ ही यूनिट की क्षमता में भी वृद्धि की गई है। यहाँ बेड की संख्या 14 से बढ़ाकर 18 कर दी गई है। यह केवल संख्यात्मक सुधार नहीं है, बल्कि गुणवत्ता के मामले में भी यह यूनिट अब बड़े निजी अस्पतालों के समकक्ष खड़ी है। यहाँ उपलब्ध अत्याधुनिक इनक्यूबेटर, फोटोथेरेपी मशीनें और हाई-टेक ऑक्सीजन सपोर्ट प्रणालियों ने नवजात शिशुओं की देखभाल को बेहद सुगम और सुरक्षित बना दिया है।

यूनिट इंचार्ज ज्योति आइजक ने बताया कि पूर्व में संसाधनों के अभाव में गंभीर स्थिति वाले बच्चों को अक्सर दूसरे जिलों या पटना रेफर करना पड़ता था। लेकिन अब निमोनिया, पीलिया या सांस की गंभीर तकलीफ से जूझ रहे नवजात बच्चों का इलाज यहीं संभव है। परिजनों को अब दर-दर भटकने की जरूरत नहीं पड़ती।

इस बदलाव की सबसे बड़ी खूबी यह है कि प्रसव से लेकर नवजात की गहन चिकित्सा तक की सभी सुविधाएँ अब एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं।
अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद के अनुसार, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता से समय से पूर्व जन्मे बच्चों को बचाने में बड़ी सफलता मिल रही है। इससे जिले में शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। महंगे निजी अस्पतालों का खर्च वहन करने में असमर्थ गरीब परिवारों के लिए यह इकाई किसी वरदान से कम नहीं है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार
