कोलकाता, 29 जनवरी (हि .स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल के मुख्य प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता देबजीत सरकार ने गुरुवार को साल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय से राज्य के मौजूदा और चिंताजनक मुद्दों को लेकर मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने मुख्यमंत्री की हालिया जनसभा में स्कूल के छात्रों को ले जाने के आरोपों को लेकर तृणमूल कांग्रेस सरकार पर कड़ा हमला बोला।

अपने संबोधन की शुरुआत में देबजीत सरकार ने कहा कि सिंगूर के नालिकुल क्षेत्र के विद्या बाणी मंदिर स्कूल के छात्रों को मुख्यमंत्री की जनसभा में ले जाया गया। उन्होंने दावा किया कि स्कूल के प्रधानाध्यापक ने स्वीकार किया है कि यह निर्देश उच्च प्रशासन की ओर से आया था। उन्होंने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया।

भाजपा नेता ने कहा कि यह मामला सिर्फ हुगली जिले के नालिकुल के विद्या बाणी मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे हुगली जिले के करीब 23 स्कूलों से ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें छात्रों को राजनीतिक कार्यक्रमों में ले जाते हुए देखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को बिरयानी के पैकेट दिए गए और प्रधानाध्यापकों को उच्च प्रशासन की ओर से ऐसा करने का निर्देश दिया गया था।
देबजीत सरकार ने साफ कहा कि भाजपा शिक्षा के राजनीतिकरण में विश्वास नहीं रखती। उन्होंने नाबालिग छात्रों को राजनीतिक सभाओं में ले जाने को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे पश्चिम बंगाल एक नए निचले स्तर पर पहुंच रहा है।
उन्होंने आगे बताया कि एक पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में यह सामने आया कि छात्रों को अभिभावकों की अनुमति के बिना मुख्यमंत्री की राजनीतिक सभा में ले जाया गया।
प्रधानाध्यापक ने यह भी कहा कि अंतिम समय में उच्च अधिकारियों से निर्देश मिलने के कारण अभिभावकों से संपर्क करने का समय नहीं मिला। देबजीत सरकार ने सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किस तरह स्कूल प्रधानाध्यापकों को इस तरह के राजनीतिक आदेश दिए जा रहे हैं।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सिर्फ शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और मेधा को दबाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब प्राथमिक स्तर की स्कूल शिक्षा को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक और अपने बच्चों को वहां भेजने वाले अभिभावक अब ‘एगिये बांग्ला’ मॉडल की सच्चाई देख रहे हैं। भाजपा ने इस पूरे मामले को शिक्षा व्यवस्था पर हमला बताते हुए कड़ी निंदा की।
देबजीत सरकार ने मांग की कि कलकत्ता उच्च न्यायालय को इस मामले में स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने राज्य के बुद्धिजीवी वर्ग पर भी निशाना साधा और कहा कि जो लोग देश के बाहर की घटनाओं पर तो विरोध करते हैं, लेकिन राज्य में हो रही घटनाओं पर चुप रहते हैं, उन्हें अपनी लेखनी और कला के जरिए शिक्षा पर हो रहे इस हमले के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि राज्य में एकमात्र मजबूत विपक्ष के रूप में भाजपा इस तरह की घटनाओं के खिलाफ लगातार आंदोलन और विरोध जारी रखेगी।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय
