कहा- रघुपति राघव राजा राम, जितना पैसा उतना काम

आशा वर्कर्स ने वैक्सीनेशन बंद कर जिलाधिकारी कार्यालय में दिया धरना, सरकारों को किया आगाह
झांसी, 30 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के 8 विकासखण्डों में वैक्सीनेशन का काम बंद करके विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर आशा बहनों ने शुक्रवार को जिलाधिकारी कार्यालय में नारेबाजी के साथ धरना-प्रदर्शन किया। दो हजार में दम नहीं और 20 हजार से कम नहीं, रघुपति राघव राजा राम, जितना पैसा उतना काम।
ऐसे नारेबाजी के साथ उन्होंने कहा कि सरकार ने उनसे किए किसी भी वादे को पूरा नहीं किया है। भले ही सरकार ने राम मंदिर बनाकर अपनी वाहवाही लूटी हो, लेकिन उससे आशा वर्करों का क्या भला हुआ। वह भी राम भक्त हैं और हर घर में भगवान राम को पूजा जाता है, लेकिन राम मंदिर बनने से उनका घर थोड़ी ही चलेगा। घर चलेगा पैसे से। उन्होंने समय और जरूरत के हिसाब से वेतन की मांग उठाई।
जिलाधिकारी मृदुल चौधरी को ज्ञापन देने के बाद सभी महिला आशा वर्कर सीएमओ कार्यालय पहुंचीं और अपना ज्ञापन दिया। यूनियन की जिलाध्यक्ष भारती सिंह ने कहा, हम स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी हैं, लेकिन सरकार हमारे बारे में कुछ नहीं सोच रही है। हमारा यह धरना प्रदर्शन 15 दिसंबर से लगातार चल रहा है। अकेले झांसी जिले के आठ ब्लॉकों में लगभग 2000 से अधिक आशा बहुएं काम कर रही है। उनकी मांग है कि आशा संगिनी का वेतन बढ़ाकर 28 हजार रुपये और आशा कार्यकर्ता का वेतन 20 हजार रुपये किया जाए। जिलाध्यक्ष ने कहा कि हम सभी ने निर्णय लिया है कि आज से कोई भी आशा बहू टीकाकरण का कार्य नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि आशा बहुएं अन्य कार्य भी छोड़ रही हैं। जच्चा-बच्चा का कार्य करना उनका धर्म है। क्योंकि वह ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं। वे नहीं चाहतीं कि सरकार की नीतियों के कारण ग्रामीणों को किसी प्रकार की क्षति पहुंचे।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि 2014 से मोदी और योगी केवल वादे करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक एक भी वादा पूरा नहीं किया गया। जब भाजपा आती है, तो अपना गाना गाती है और बसपा आती है तो अपना, लेकिन किसी भी सरकार ने आशा बहुओं की ओर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो भी उनकी मांगें पूरी करेगा, वे उसी की सरकार बनाएंगीं।
2023 से अभी तक का नहीं मिला पूरा पैसा
उन्होंने कहा, मौजूदा समय में आशाओं को मात्र दो हजार रुपये मिलते हैं। ये भी कभी समय पर नहीं दिए जाते। 74 मदों में से उन्हें बमुश्किल चार मदों का ही भुगतान मिलता है। 2023 से अभी तक का पूरा बकाया पैसा नहीं मिला है। उन्होंने सरकार से मांग की कि आशा कार्यकर्ताओं को राज्य के सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
परिजनों के निधन पर भी नहीं मिलता अवकाश
भारती सिंह ने कहा कि सरकार हर काम आशाओं पर थोप देती है। चाहे वह टीकाकरण हो, चुनाव में बीएलओ ड्यूटी हो या स्वास्थ्य विभाग का कोई भी अन्य काम। हर काम में आशाओं को ही आगे रखा जाता है। हमें त्योहारों जैसे दीपावली या पारिवारिक आपात स्थित में,बच्चे की बीमारी, पति या पिता के निधन पर भी छुट्टी नहीं दी जाती। अधिकारियों द्वारा उन्हें तुरंत ड्यूटी पर लौटने का दबाव बनाया जाता है। आखिर हम भी तो इंसान हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया
