अनूपपुर, 31 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनूपपुर, माया विश्वलाल ने शनिवार को जिला जेल अनूपपुर का औचक निरीक्षण किया। जहां उन्होंने पुरुष एवं महिला बैरकों का निरीक्षण के साथ न्यायालयीन पेशियों में हो रहे विलंब और जेल में दिये जा रहे भोजन, स्वास्थ्य व आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में विस्तृत पूछताछ की। साथ ही जेल अधीक्षक को संवेदनशील रहने की हिदायत दी कि जेल प्रशासन का रवैया सुधारात्मक होना चाहिए। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव विनोद कुमार वर्मा एवं जिला रजिस्ट्रार बॉबी सोनकर की उपस्थिति रहे।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश माया विश्वलाल ने बिना किसी पूर्व सूचना के जिला जेल का औचक निरीक्षण किया। न्यायाधीश ने जेल के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही सीधे सुरक्षा प्रोटोकॉल और संतरी ड्यूटी की जांच करते हुए, पुरुष एवं महिला बैरकों का निरीक्षण किया, वहां निरुद्ध बंदियों से बारी-बारी से मुलाकात कर उनके प्रकरणों की वर्तमान स्थिति, न्यायालयीन पेशियों में हो रहे विलंब और जेल में दी जा रही भोजन, स्वास्थ्य व आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्तम किया। उन्होंने बंदियों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड की जांच करते हुए बीमार बंदियों के लिए समुचित चिकित्सा प्रबंध सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जेल अधीक्षक इंद्रदेव तिवारी को दिए।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की नवीन निर्धन बंदियों के लिए वित्तीय एवं विधिक सहायता योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना था। प्रधान जिला न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि ऐसे विचाराधीन बंदी जिन्हें न्यायालय द्वारा जमानत तो प्रदान कर दी गई है परंतु वे अपनी दयनीय आर्थिक स्थिति और जमानत राशि का प्रबंध करने में अक्षमता के कारण अभी भी जेल में निरुद्ध हैं, उनकी सूची तत्काल तैयार कर प्राधिकरण को प्रेषित की जाए ताकि शासन की नवीन कल्याणकारी योजना का लाभ दिलाकर उन्हें शीघ्रता से रिहा कराया जा सके।
प्रधान न्यायाधीश ने जेल परिसर की स्वच्छता, रसोई घर की शुद्धता और महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों की विशेष देखभाल हेतु जेल अधीक्षक को संवेदनशील रहने की हिदायत देते हुए यह स्पष्ट किया कि जेल प्रशासन का रवैया सुधारात्मक होना चाहिए और जेल नियमावली के उल्लंघन की दशा में सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि न्याय प्रणाली का लक्ष्य केवल दंड देना नहीं बल्कि समाज के वंचित और निर्धन वर्गों के मानवाधिकारों का संरक्षण करते हुए उन्हें सुधार की मुख्यधारा से जोड़ना हैं। औचक निरीक्षण की सघनता और व्यापकता ने यह संदेश प्रसारित किया है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनूपपुर सलाखों के पीछे निरुद्ध अंतिम व्यक्ति तक न्याय की सुलभता पहुँचाने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
सचिव विनोद कुमार वर्मा ने जेल के विधिक सहायता केंद्र को और अधिक सक्रिय बनाने पर बल दिया ताकि श्लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के माध्यम से प्रत्येक निर्धन बंदी को सक्षम विधिक पैरवी निःशुल्क प्राप्त हो सके, वहीं जिला रजिस्ट्रार बॉबी सोनकर ने जेल के प्रशासनिक एवं न्यायिक अभिलेखों का सूक्ष्म ऑडिट किया ताकि सजा की अवधि और पेशियों के रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की मानवीय त्रुटि की गुंजाइश न रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला
