नई दिल्ली, 01 फ़रवरी (हि.स.)। देश में बढ़ती मधुमेह, कैंसर, हृदय, किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियों जैसे- गैर संक्रामक रोगों को देखते हुए सरकार अगले 5 सालों में फार्मा और बायो‑टेक सेक्टर के विकास में 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए सरकार जांच और शुरुआती इलाज पर विशेष ध्यान देगी ताकि लोगों को इन बीमारियों से बचाने की क्षमता को मजबूत किया जा सके।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में अपने बजट भाषण में कहा कि देश में रोग‑भार लगातार बढ़ रहा है और अब यह ज्यादातर गैर‑संक्रामक रोग यानी डायबिटीज, कैंसर, हृदय संबंधी बीमारी, किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियों की तरफ झुक रहा है। इसी वजह से सरकार का पूरा ध्यान रोकथाम, जांच और शुरुआती इलाज पर रहेगा ताकि लोगों को इन बीमारियों से बचाने की क्षमता मजबूत हो सके।

वित्त मंत्री कहा कि अगले पांच साल में 10 हजार करोड़ रुपये बायो‑फार्मा सेक्टर के विकास पर खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, टीका निर्माण और उन्नत उपचार पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। साथ ही औषधीय शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए तीन नए राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान(एनपीईआरएस) स्थापित किए जाएंगे, जिनसे गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास, अत्याधुनिक लैब सुविधाएं और वैश्विक प्रतिभा तैयार करने में मदद मिलेगी।
सीतारमण ने कहा कि लगातार सुधारों और नीतियों के चलते देश ने 7 प्रतिशत की उच्च विकास दर हासिल की है। भारत अब विकसित भारत की दिशा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है और यह यात्रा लगातार जारी रहेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक सिद्धांत मानते हुए सरकार ने घरेलू विनिर्माण क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है। रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता, घरेलू क्रय शक्ति और सार्वभौमिक सेवाओं को बढ़ाने के लिए सुधार किए गए हैं। इन उपायों से गरीबी कम करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने में अहम प्रगति हुई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर
