- कोविड-19 की तीसरी लहर का डर छात्रों में है कायम
बिक्रमगंज (रोहतास) जंहा कोरोना संक्रमण लगभग दो वर्षो से पूरे भारत सहित विश्व में तबाही मचा रखा है। जिसको लेकर सभी जगह हर एक दिन लोगों को नई मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। इसका सबसे प्रतिकूल असर शिक्षा जगत पर पड़ती नजर आयी। जिस कारण आज शिक्षा दीक्षा को लेकर छात्रों का भविष्य अधर में लटकता जा रहा है। जिस कोरोना संक्रमण को लेकर भारत के सभी राज्य के स्कूल व कॉलेज पर ताले लटकते नजर आ रहें है। जंहा पढ़ाई करने वाले बच्चे अब स्कूल- कॉलेज के पठन- पठान पर निर्भर रहना भी भूल चुंके है। जिस पढ़ाई के लिए विकल्प स्वरूप उन्होंने ऑनलाइन स्टडी को ही एक आधार मान लिया है। जिसके जरिये वह घर पर ही बैठ ऑनलाइन पढ़ाई मोबाइल व लैपटॉप के सहारे कर रहें है। हालांकि फिलहाल बिहार सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण की गाइडलाइंस का पालन करते हुए अगस्त माह से सीनियर स्टूडेंट्स के लिए कॉलेज ओपन करने की अनुमति सारे को प्रदान की गई है। इसके बावजूद भी पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की संख्या नग्न देखा जा रहा है। जिसका मुख्य कारण देश में आनेवाली कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर का डर अभी से ही लोगों के मन में कायम है।

दूसरी तरफ जूनियर क्लास के बच्चे स्कूल बन्दी को लेकर आज भी अपनी पढ़ाई घर पर ही ऑनलाइन के सहारे कर रहें है। इस संबंध में छात्र शिवानी, अनन्या, दीबू, नित्या , रोहित, सलोनी, पूजा, दीक्षा, उज्वल, अंकित, ने बताया कि कोरोना के बाद से ही ऑफलाइन पढ़ाई बंद होने के कारण आज ऑनलाइन पढ़ाई करने में कठिनाई हो रही है।


क्या कहते है चिकित्सक —
इस संबंध में नेत्र सहायक डॉ० पंकज कुमार ने बताया कि लगातार जो बच्चे मोबाइल व लैपटॉप के जरिये ऑनलाइन पढ़ाई करने से उनकी आंखों की रौशनी पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। जिससे उनकी आंखों में जलन, ड्राई सूखापन, किचकीची, एलर्जी, मानसिक तनाव जैसी समस्या आ सकती है। जिससे बचाव हेतु स्टूडेंट्स को पढ़ाई समय कुछ दूरी बनाते हुए एआरसी या ब्लूक्ट ग्लास का चश्मा उपयोग करनी चाहिए।
