लुवास में पशु चिकित्सा में एआई व मशीन लर्निंग

पर राष्ट्रीय महत्व की संगोष्ठी आयोजित

हिसार, 07 फरवरी (हि.स.)। लाला लाजपत राय पशु
चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा महाविद्यालय के पशु चिकित्सा
विभाग की ओर से ‘पशु चिकित्सा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग: वर्तमान एवं
भविष्य परिप्रेक्ष्य’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद
कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में हुई इस संगोष्ठी की अध्यक्षता पशु चिकित्सा महाविद्यालय
के अधिष्ठाता डॉ. मनोज रोज ने की।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो.
(डॉ.) विनोद कुमार वर्मा ने शनिवार काे अपने संबोधन में कहा कि बदलते समय में पशु चिकित्सा विज्ञान
को नई तकनीकों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग भविष्य
की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के माध्यम
से रोगों की प्रारंभिक पहचान, सटीक एवं त्वरित निदान, उपचार की बेहतर योजना तथा पशुओं
की निरंतर स्वास्थ्य निगरानी संभव हो पाएगी।
विभागाध्यक्ष एवं आयोजन सचिव डॉ. दिव्या ने बताया
कि संगोष्ठी का उद्देश्य पशु चिकित्सा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच समन्वय स्थापित
करना था। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के 16 संकाय सदस्यों तथा 42 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों
ने भाग लिया। तकनीकी सत्रों में तीन व्याख्यान आयोजित हुए, जिनमें डॉ. देवनजली रेलन
द्वारा ‘एआई द्वारा पशु चिकित्सा निदान में परिवर्तन’, डॉ. गौरव चराया द्वारा
‘बड़े पशुओं में हेमोप्रोटोजोअन की पहचान: पारंपरिक एवं आधुनिक विधियां’ तथा डॉ. मोनिका मोकन
द्वारा ‘रेटिनल इमेज विश्लेषण के लिए डीप लर्निंग: मानव अनुसंधान से पशु चिकित्सा तक’ विषय पर प्रस्तुति
दी गई।
पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनोज
रोज ने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियां विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों को नवीन तकनीकों
से परिचित कराने में अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने विभाग को सफल आयोजन के लिए बधाई देते
हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
समापन समारोह की मुख्य अतिथि मानव संसाधन एवं
प्रबंधन निदेशिका डॉ. सोनिया सिंधु ने संगोष्ठी के विषयों की प्रासंगिकता की सराहना
की और कहा कि आधुनिक तकनीकों के समावेश से पशु चिकित्सा शिक्षा एवं शोध को नई दिशा
मिलेगी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण निदेशक
डॉ. संदीप गुप्ता, अनुसंधान निदेशक डॉ. नरेश जिंदल, आईपीवीएस निदेशक डॉ. पवन, विस्तार
शिक्षा निदेशक डॉ. गौतम, लेखा नियंत्रक विकास खर्ब सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित
रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रवीण कुमार, सहायक प्रोफेसर द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों
को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर
