Jammu, 07 फ़रवरी (हि.स.)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एनएसयूआई के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट फैरोज खान ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर दोनों के बजट 2026-27 पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों बजटों में विकास की बात तो बार-बार की गई है लेकिन बेरोजगारी, क्षेत्रीय असंतुलन और बुनियादी सार्वजनिक अवसंरचना जैसी समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं किया गया है।

एडवोकेट फैरोज खान ने कहा, “केंद्र और जम्मू-कश्मीर दोनों के बजट विकास की बात करते हैं लेकिन बेरोजगारी, क्षेत्रीय असंतुलन और बुनियादी सार्वजनिक अवसंरचना जैसी समस्याओं का समाधान करने में विफल रहे हैं।

बेरोजगार युवाओं से लेकर चिनाब घाटी जैसे उपेक्षित क्षेत्रों और रामबन कोर्ट कॉम्प्लेक्स जैसी न्यायिक सुविधाओं की कमी तक, वादों और प्रावधानों के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।” राष्ट्रीय सम्मेलन के चुनावी वादों का जिक्र करते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए प्रमुख वादों के लिए ठोस वित्तीय सहायता के अभाव पर सवाल उठाया।
एनसी सरकार ने एक लाख नौकरियों प्रति वर्ष बारह एलपीजी सिलेंडरों और 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया था। मौजूदा बजट में इन वादों के लिए आवंटन, समयसीमा या कार्यान्वयन तंत्र का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। लोग अब सवाल कर रहे हैं कि क्या ये पक्के वादे थे या महज़ जुमले उन्होंने टिप्पणी की।
उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है सरकारी आंकड़ों के अनुसार बेरोजगारी दर लगभग 6.1 प्रतिशत है और 3.7 लाख से अधिक पंजीकृत बेरोजगार युवा हैं। बजट में कौशल विकास और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी देने का उल्लेख तो है, लेकिन कोई व्यापक, वित्तपोषित रोजगार पैकेज या प्रत्यक्ष बेरोजगारी भत्ता का प्रावधान नहीं है। एडवोकेट फैरोज खान ने आगे कहा कि रामबन, डोडा और किश्तवार को मिलाकर बनी चेनाब घाटी को अभी भी नजरअंदाज किया जा रहा है, इस क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, इसके लिए कोई विशेष विकास पैकेज, लक्षित रोजगार योजना या बुनियादी ढांचे पर केंद्रित कोई जोर नहीं दिया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / SONIA LALOTRA
