नई दिल्ली, 07 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को कहा कि बाघों के प्रभावी संरक्षण के लिए नीतिगत निर्णयों की व्यापक समीक्षा और क्षेत्रवार चुनौतियों की पहचान आवश्यक है। भारत ने बाघ संरक्षण के 50 वर्ष पूरे कर लिए और यह व्यापक नीति समीक्षा का उपयुक्त समय है।

राजस्थान के अलवर में आयोजित ‘बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और बाघ अभ्यारण्यों के फील्ड निदेशकों के सम्मेलन’ के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए भूपेन्द्र य़ादव ने सुझाव दिया कि पिछले पांच दशकों में लिए गए नीतिगत निर्णयों को एक औपचारिक नीतिगत वक्तव्य में संकलित किया जाना चाहिए और इस मुद्दे को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की अगली बैठक के पहले एजेंडा आइटम के रूप में रखा जाना चाहिए। इस पहल से बाघ संरक्षण नीति को वर्तमान समय की चुनौतियों के अनुरूप ढालने और जमीनी स्तर पर संरक्षण उपायों के कुशल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

दो दिवसीय सम्मेलन में यादव ने कहा कि बाघ गणना आकलन, बचाव एवं पुनर्वास अवसंरचना, मानव-वन्यजीव संघर्ष, टाइगर रिज़र्व फंड के उपयोग और बाघ संरक्षण के संस्थागत ढांचे को सुदृढ़ करने जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श की आवश्यकता है। उन्होंने एऩटीसीए और भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, प्राणी सर्वेक्षण भारत तथा भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद जैसे संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर भी ज़ोर दिया, ताकि शोध आधारित सुझावों को व्यावहारिक संरक्षण प्रयासों में बदला जा सके।
चीतों के पुनःप्रवेश कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने विलुप्त हो चुकी एक वन्य प्रजाति के अंतरराष्ट्रीय स्थानांतरण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है और इस परियोजना के तहत अब भारत में चीतों की तीसरी पीढ़ी आ चुकी है। उन्होंने बताया कि बोत्सवाना से चीतों का एक नया समूह फरवरी के अंत तक भारत आने की संभावना है।
मंत्री ने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) की स्थापना की है, जिसके अब तक 24 सदस्य देश बन चुके हैं, जबकि कई अन्य देशों ने पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त करने की इच्छा जताई है। केंद्रीय बजट में भारत में पहले ग्लोबल बिग कैट समिट के आयोजन की घोषणा की गई है।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे बाघ और अन्य वन्यजीव कोर क्षेत्रों से बाहर विचरण कर रहे हैं, मज़बूत प्रतिक्रिया प्रणालियों की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। घायल वन्यजीवों, संघर्ष से जुड़े मामलों, अनाथ शावकों और तनावग्रस्त जानवरों के लिए समयबद्ध एवं पेशेवर हस्तक्षेप आवश्यक है। इसके लिए बाघ अभयारण्यों के आसपास बचाव, पुनर्वास और ट्रांज़िट ट्रीटमेंट सेंटर्स हेतु एक स्पष्ट और मानकीकृत ढांचा विकसित किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर मंत्री ने एऩटीसीए की आउटरिच पत्रिका ‘स्ट्राइप्स’ का विमोचन किया तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय द्वारा आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेता छात्रों को पुरस्कार प्रदान किए।
दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान राज्य स्तरीय अधिकारी और फील्ड प्रबंधक संरक्षण प्राथमिकताओं, कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों और उभरती आवश्यकताओं पर एकीकृत दृष्टिकोण से चर्चा करेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी
