धमतरी, 07 फ़रवरी (हि.स.)। सरकारी जिला अस्पताल में निशुल्क इलाज और दवाइयों के सरकारी दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। अस्पताल परिसर में सुबह से ही गरीब मरीजों की लंबी कतारें और अस्पताल के बाहर निजी मेडिकल स्टोरों में उमड़ती भीड़ कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यह दृश्य साफ संकेत देता है कि जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले गरीब मरीजों को दवाइयों के लिए निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है।

जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना धमतरी शहर सहित मगरलोड, नगरी, कुरूद, बालोद और कांकेर जिले से 300 से 400 मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। इनमें अधिकांश महिलाएं, बुजुर्ग, श्रमिक और ग्रामीण क्षेत्र के गरीब परिवार शामिल होते हैं। सरकारी योजनाओं के तहत इन्हें मुफ्त इलाज और दवाइयां मिलने की व्यवस्था है, लेकिन अस्पताल परिसर में दिख रही स्थिति इन दावों को झुठलाती नजर आती है। नाम न छापने की शर्त पर कई मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि जांच के बाद डॉक्टर पर्ची पर जो दवाइयां लिखते हैं, वे अक्सर अस्पताल के दवा वितरण केंद्र में उपलब्ध नहीं होतीं। कई मामलों में मरीजों से सीधे बाहर से दवा खरीदने की बात कही जाती है। मजबूरी में मरीज अस्पताल के बाहर स्थित निजी मेडिकल स्टोरों की ओर रुख करते हैं, जहां महंगी दवाइयों का बोझ गरीब परिवारों की कमर तोड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र से आए एक मरीज के परिजन ने बताया कि वे मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सरकारी अस्पताल इसलिए आते हैं कि इलाज और दवा मुफ्त मिले, लेकिन यहां पर्ची लेकर बाहर दवा खरीदनी पड़ रही है। अस्पताल तक पहुंचने में ही पैसे खर्च हो जाते हैं, ऊपर से दवाइयों का खर्च अलग से उठाना पड़ता है।
दो पर्चियों पर लिखी जा रही दवाइयां:
मरीजों ने आरोप लगाया कि डाक्टर एक नहीं, बल्कि दो-दो पर्चियां बना रहे हैं। एक पर्ची पर वे दवाइयां लिखी जाती हैं जो सरकारी दवा वितरण केंद्र में उपलब्ध बताई जाती हैं, जबकि दूसरी पर्ची पर ऐसी दवाइयां लिखी जा रही हैं जिन्हें मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से खरीदना पड़ता है। इससे मरीजों में असमंजस और आक्रोश दोनों बढ़ रहा है।
गरीब मरीजों की जेब पर सीधा असर:
महंगाई के दौर में यह व्यवस्था गरीब मरीजों के लिए दोहरी मार साबित हो रही है। इलाज की आस लेकर अस्पताल पहुंचने वाले लोग आर्थिक दबाव में आकर या तो दवा नहीं खरीद पाते या कर्ज लेने को मजबूर हो जाते हैं। दूसरी ओर, जिला अस्पताल के दवा वितरण केंद्र के व्यवस्थापक का दावा है कि केंद्र में पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं और नियमित रूप से स्टाक मंगाया जाता है। उनका कहना है कि सूचीबद्ध दवाइयां मरीजों को निश्शुल्क दी जा रही हैं और यदि किसी दवा की अस्थायी कमी होती है तो उसे जल्द पूरा कर लिया जाता है।
दवा वितरण केंद्र प्रभारी अश्विनी ठाकुर ने बताया कि, दवा वितरण केन्द्र में सभी प्रकार की दवाईयां उपलब्ध है। मरीज क्यों निजी मेडिकल स्टोरों से दवाईयां खरीद रहे हैं इस संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है।
सिविल सर्जन जिला अस्पताल धमतरी डा अरूण टोंडर के मुताबिक, अस्पताल में उपलब्ध होने वाले निर्धारित 264 दवाईयों में से लगभग 215 दवाईयां दवा वितरण केन्द्र में उपलब्ध हैं। ये सभी दवाईयां जेनेरिक हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा
