जबलपुर, 07 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जबलपुर में कटंगी रोड सूरतलाई में कृष्णापुरम फार्म हाउस के रूप में बताकर कॉलोनी प्लाट बेचे जा रहे थे। उच्च न्यायालय में लगी याचिका में उसकी सच्चाई सामने आ गयी है।

संचालक प्रवीण पटेल के अनुसार उन्होंने रेरा में रजिस्ट्रेशन इसलिए नही कराया क्योंकि वह केवल फार्म हाउस बेच रहे हैं, कॉलोनी नहीं बना रहे। इस बात की शिकायत मिलने के बाद रेरा ने कृष्णा डेवलपर्स पर पेनल्टी लगाई। जिसके बाद उन्होंने प्राधिकरण में अपील की। लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। प्रवीण पटेल ने इस आदेश के खिलाफ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में अपील दायर की।
उन्होंने तर्क दिया कि फार्म हाउस के लिए जमीन बेचने पर रेरा रजिस्ट्रेशन आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने फार्महाउस की जमीन का एरिया पूछा। बिल्डर ने बताया कि प्रत्येक फार्म हाउस 5000 स्क्वायर फीट का है। इस पर कोर्ट ने हैरानी जताते हुए टिप्पणी की कि 5000 स्क्वायर फीट में कौन सा फार्म हाउस और कौन सी खेती होगी। कोर्ट ने जब प्रोजेक्ट का ब्रोशर मांगा तो बिल्डर की ओर से कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।
कुछ समय बाद चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने कृष्णा डेवलपर्स का फेसबुक पेज देखा। पेज पर प्रोजेक्ट की पूरी मार्केटिंग खुलेआम की जा रही थी। इस पेज के मुताबिक 5000 स्क्वायर फीट के प्लॉट, 30 फीट चौड़ी सड़क, गेटेड कम्युनिटी, 24 घंटे बिजली-पानी जैसी सुविधाओं का दावा किया गया था। साथ ही लिखा गया था कि 5000 स्क्वायर फीट में से 400 स्क्वायर फीट गार्डन एरिया होगा और शेष 4600 स्क्वायर फीट में मकान निर्माण की योजना थी। कोर्ट ने कहा कि यह फार्म हाउस नहीं, बल्कि प्लॉट बेचकर कॉलोनी विकसित करने का मामला है।
डिवीजन बेंच ने कहा कि पंचायत की अनुमति, सक्षम प्राधिकरण की स्वीकृति और रेरा रजिस्ट्रेशन के बिना कॉलोनी विकसित करना गैर-कानूनी है। इसे कृषि भूमि पर प्लॉटिंग का मामला माना गया। कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए बिल्डर की ओर से याचिका वापस ले ली गई। फार्म हाउस के नाम पर जमीन बेचने का दावा करने वाले कृष्णा डेवलपर्स की सच्चाई फेसबुक पेज के माध्यम से आखिर हाईकोर्ट में उजागर हो ही गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक
