नई दिल्ली, 08 फ़रवरी (हि.स.)। साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस संबंध में दो मुख्य आरोपित अनीश सिंह और मणि सिंह को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया है कि आरोपितों से जुड़े बैंक खातों पर देशभर में दर्ज 190 से ज्यादा साइबर ठगी की शिकायतें हैं और इन खातों के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की रकम का लेन-देन किया गया।

क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने रविवार को बताया कि यह मामला सिर्फ आर्थिक ठगी का नहीं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न और डिजिटल माध्यम से अवैध कैद जैसा है। पीड़िता को खुद को आईपीएस अधिकारी बताने वाले साइबर ठग ने कॉल कर धमकाया और गंभीर अपराधों में फंसाने की बात कही। 15 अक्टूबर 2025 से 12 दिसंबर 2025 तक पीड़िता को लगातार डर, दबाव और धमकियों के बीच रखा गया, जिसे पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ बताया है।
आरोपित ने खुद को मुंबई साइबर क्राइम का आईपीएस अधिकारी राघव मित्तल बताकर आधार कार्ड के दुरुपयोग का आरोप लगाया। इसके बाद कॉल को एक महिला ‘अधिकारी’ से ट्रांसफर किया गया, जिसने फर्जी एफआईआर, जाली गिरफ्तारी वारंट और वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी की धमकी देकर पीड़िता को पूरी तरह तोड़ दिया।
परिवार से अलग-थलग कर बनाया बंधक
आरोपितों ने पीड़िता को सख्त निर्देश दिए कि वह किसी से भी बात न करे। यहां तक कि परिवार को भी कुछ बताने पर पति और बेटे को फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी दी गई। पीड़िता को रोजाना आरोपितों को रिपोर्ट करनी पड़ती थी कि उसने किसी से संपर्क नहीं किया है। इस मानसिक दबाव में पीड़िता ने अपनी जीवनभर की कमाई 40 लाख रुपये आरोपितां के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
ठगी के बाद भी आरोपितों ने ‘सत्यापन’ और पैसे लौटाने का झांसा देकर पीड़िता को मानसिक रूप से नियंत्रित रखा। हर भुगतान के बाद उससे चैट, कॉल लॉग और डिजिटल सबूत डिलीट कराए गए।
पुलिस उपायुक्त के अनुसार मामले की जांच इंस्पेक्टर संदीप सिंह को सौंपी गई। पुलिस टीम ने डिलीट किए गए डेटा और लेन-देन का बारीकी से विश्लेषण किया। जांच में एम/एस वृंदाकार्ट स्काईलाइन शॉपर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित एक बैंक खाता सामने आया, जिसके निदेशक अनीश सिंह और मणि सिंह हैं।
पुलिस उपायुक्त ने आगे बताया कि लेन-देन की जांच में लेयर-1 से लेयर-4 तक मनी ट्रेल सामने आई। एनसीआरपी पोर्टल के अनुसार इस खाते से जुड़े 190 साइबर फ्रॉड मामलों की शिकायतें दर्ज हैं। जिनमें ठगी की रकम 100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर आरोपितों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपितों ने कबूल किया कि कंपनी के नाम पर अलग-अलग बैंकों में आठ खाते खोले गए थे, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम घुमाने के लिए किया जाता था।
फर्जी सिम और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित फर्जी सिम कार्ड और जाली दस्तावेजों के जरिए पहचान छिपाकर काम कर रहे थे। दोनों आरोपित इससे पहले भी इसी तरह के एक मामले में फरीदाबाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी
