कानपुर, 08 फरवरी (हि.स.)। शनि साई मंदिर, गांधी नगर गणेश पार्क में आयोजित 26वें वार्षिकोत्सव के तहत रविवार को छठे दिन धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर 58 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार कराया गया। यज्ञ वेदी के चारों ओर बैठे बटुकों ने विधिवत संकल्प लेकर यज्ञोपवीत के नियमों का पालन करने का वचन दिया।

कार्यक्रम के मुख्य आचार्य कृपा शंकर शुक्ला ने बताया कि वैदिक धर्म में यज्ञोपवीत संस्कार को एकादश संस्कार का विशेष महत्व प्राप्त है। इस संस्कार के माध्यम से बटुक को गायत्री मंत्र की दीक्षा दी जाती है और उसे आध्यात्मिक एवं नैतिक जीवन की ओर अग्रसर किया जाता है। उन्होंने बताया कि गायत्री मंत्र का जाप आत्मिक शुद्धि, संयम और ज्ञान की प्राप्ति का माध्यम है।

गायत्री मंत्र की दीक्षा के पश्चात बटुकों ने परंपरानुसार भिक्षा ग्रहण कर गुरु को अर्पित की। इसके बाद आचार्यों ने उन्हें गुरु मंत्र प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय बना रहा।
शाम के समय आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास दीपक कृष्ण महाराज ने महारास लीला, कंस वध और रुक्मणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भागवत की प्राप्ति के लिए आस्था और विश्वास के साथ-साथ दृढ़ निश्चय और सतत परिश्रम भी आवश्यक है।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक महेंद्र नाथ शुक्ला, राजेंद्र नाथ शुक्ला, श्रीश शुक्ला, आचार्य गंगा शरण दीक्षित, आचार्य विनोद अग्निहोत्री, अमित तिवारी, अंकित मिश्रा, अंशु शुक्ला, राहुल दुबे आदि उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
