अगरतला, 09 फरवरी (हि.स.)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. (प्रो) माणिक साहा ने टिपरा मोथा पार्टी के नेतृत्व वाली त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (टीटीएएडीसी) द्वारा कथित तौर पर किए गए हर अनैतिक काम को सार्वजनिक रूप से उजागर करने की धमकी दी और दावा किया कि राज्य सरकार को आदिवासी परिषद के अंदर हो रहे घटनाक्रमों की पूरी जानकारी है।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए, माणिक साहा ने आरोप लगाया कि टिपरा मोथा के नेतृत्व में परिषद वित्तीय अनुशासनहीनता के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन देने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि पेंशन जारी करने में असमर्थता परिषद स्तर पर धन के गंभीर कुप्रबंधन को दर्शाती है।
खुमुलवंग स्थित परिषद मुख्यालय का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार सीधे तौर पर पेंशन फंड नहीं देती हैं और ऐसे भुगतान परिषद द्वारा अनुशासित खर्च पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी परिषद में वित्तीय अनुशासनहीनता के कारण वे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन नहीं दे पा रहे हैं। केंद्र या राज्य प्रतिबद्ध खर्च के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए अतिरिक्त पैसा नहीं देते हैं।
मुख्यमंत्री ने टीटीएएडीसी पर ग्राम समितियों (वीसी) के चुनाव में देरी करने का भी आरोप लगाया और कहा कि वर्तमान परिषद कानूनी प्रावधानों का पालन करने में विफल रही है और अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद सत्ता हस्तांतरित नहीं की है। साहा के अनुसार, नई ग्राम समितियों के गठन के बाद वीसी चुनाव कराने की प्रक्रिया रुक गई है।
फरवरी 2021 में 587 ग्राम समितियों के चुनाव होने थे, लेकिन अभी तक नहीं हुए हैं। माणिक साहा ने कहा कि इस देरी के कारण लोगों का कल्याण प्रभावित हो रहा है और इस बात पर जोर दिया कि सभी विकासात्मक कार्य राज्य सरकार द्वारा उचित समय पर किए जा रहे हैं।
लंबे समय से लंबित रियांग शरणार्थी मुद्दे को सुलझाने के टिपरा मोथा के दावों पर तंज कसते हुए, साहा ने कहा कि पुनर्वास प्रक्रिया 23 साल के लंबे संघर्ष के बाद पूरी हुई और जोर देकर कहा कि किसी भी व्यक्ति या पार्टी को इसका अनुचित श्रेय नहीं लेना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ) के आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को वापस लाने का श्रेय लेने के लिए टिपरा मोथा की आलोचना की और कहा कि इस पहल के लिए उनकी सरकार जिम्मेदार थी।
उन्होंने कहा कि केंद्र ने शांति समझौते के तहत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों के पुनर्वास के लिए 250 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं और शांति प्रक्रिया में राजनीतिक नेताओं को शामिल करने के प्रयास जारी हैं। इससे पहले, मुख्यमंत्री ने अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के 413 लोगों के समर्थन का स्वागत किया, जो भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन में शामिल हुए थे।———————-
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय
