पुरुलिया, 09 फरवरी (हि. स.)। जिले में कभी ‘भूतिया स्टेशन’ के नाम से कुख्यात रहा बेगुनकोदर रेलवे स्टेशन अब अपनी पुरानी पहचान को पूरी तरह बदलने की ओर अग्रसर है। दक्षिण-पूर्व रेलवे के रांची मंडल के अंतर्गत आने वाले इस स्टेशन को अब ‘हॉल्ट’ से उन्नत कर पूर्ण विकसित स्टेशन का दर्जा देने की तैयारी शुरू हो गई है।

हाल ही में रेलवे ने बोकारो स्टील सिटी–आसनसोल पैसेंजर ट्रेन के बेगुनकोदर में ठहराव को स्वीकृति दी है। इसके साथ ही इस स्टेशन पर रुकने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़कर अब सात जोड़ी हो गई है, जिससे क्षेत्रीय यात्रियों को काफी सुविधा मिलने लगी है।पर्यटन और जनसांख्यिकी के कारण बढ़ा महत्व कभी वीरान और उपेक्षित नजर आने वाला यह स्टेशन अब आधुनिक यात्री सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। प्लेटफार्मों की ऊंचाई बढ़ाई गई है, यात्री शेड का निर्माण किया गया है तथा फुट ओवर ब्रिज को चौड़ा किया गया है। अयोध्या पहाड़ के समीप स्थित होने के कारण इस क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं भी देखी जा रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भूतों से जुड़ी कहानियां केवल अफवाह थीं, जबकि आज स्टेशन रात के समय भी रोशनी से जगमगाता रहता है।
पुरुलिया के भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने बताया कि उन्होंने रेल मंत्रालय को बेगुनकोदर को पूर्ण स्टेशन का दर्जा देने का प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि रेलवे जल्द ही इस प्रस्ताव को मंजूरी देगा। इतिहास के अनुसार, मूरी–कोटशिला रेल खंड पर स्थित यह स्टेशन पहले पूर्ण स्टेशन के रूप में ही कार्यरत था, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। उस समय यह अफवाह फैली थी कि रेलकर्मी भूतों के डर से स्टेशन छोड़कर चले गए, जबकि जानकारों का मानना है कि तकनीकी कारणों तथा ब्रॉडगेज लाइन विस्तार के चलते इसकी उपयोगिता कम हो गई थी। वर्ष 2009 में तत्कालीन सांसद वासुदेव आचार्य के प्रयास से इसे पुनः पैसेंजर हॉल्ट के रूप में शुरू किया गया।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, झालदा और कोटशिला स्टेशनों के बीच की दूरी लगभग 12 किलोमीटर है। इस व्यस्त रेल मार्ग पर वंदे भारत, राजधानी और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनें गुजरती हैं। ऐसे में बेगुनकोदर में अतिरिक्त लूप लाइन का निर्माण कर इसे पूर्ण स्टेशन में परिवर्तित करने से परिचालन में उल्लेखनीय सुगमता आएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
