धौलपुर, 09 फ़रवरी (हि.स.)। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत धौलपुर जिले ने टीबी नियंत्रण के क्षेत्र में प्रदेश स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत सघन जांच, समयबद्ध उपचार और सामाजिक सहयोग के माध्यम से जिले में टीबी मामलों की पहचान और उपचार में सुधार हुआ है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धर्मसिंह मीणा ने बताया कि गत वर्ष से अब तक जिले में 2 लाख 99 हजार 315 व्यक्तियों की टीबी स्क्रीनिंग की गई है। इस दौरान 1 लाख 33 हजार 359 एक्स-रे, 22 हजार 795 नॉट (NAAT) टेस्ट तथा 4 हजार 140 माइक्रोस्कोप एएफबी जांच कराई गईं। इन जांचों के माध्यम से टीबी के संदिग्ध और सक्रिय मामलों की शीघ्र पहचान कर समय पर उपचार शुरू किया गया।

डॉ. मीणा ने बताया कि टीबी मरीजों के उपचार के साथ-साथ पोषण और सामाजिक सहयोग पर भी ध्यान दिया गया। जिला प्रशासन की पहल पर 1 हजार 311 निक्षय मित्रों को जोड़ा गया, जिनके माध्यम से 7 हजार 328 टीबी मरीजों को पोषण किट उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त 1 हजार 584 मरीजों को निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि हाई रिस्क आबादी की पहचान कर विशेष रणनीति के तहत कार्य किया गया। आधुनिक जांच तकनीकों के उपयोग, मोबाइल टीमों की तैनाती तथा आशा, एएनएम, सीएचओ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रिय भागीदारी से अभियान को गति मिली है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. गोविंद सिंह मीणा ने बताया कि आगामी कार्ययोजना के तहत हाई रिस्क गांवों में हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीन से सघन जांच, नॉट टेस्ट द्वारा त्वरित पुष्टि और प्रतिदिन की रिपोर्टिंग व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, ताकि संभावित मामलों की प्रारंभिक स्तर पर पहचान की जा सके।
उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति में दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना या कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जांच कराएं। टीबी उपचार योग्य बीमारी है और समय पर जांच तथा पूरा उपचार आवश्यक है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रदीप
