मुंबई ,09 फरवरी (हि. स.) । महिला एम्पावरमेंट के साथ-साथ एनवायरनमेंट कंजर्वेशन को बढ़ावा देने के मकसद से, हाल ही में ठाणे मनपा के पर्यावरण विभाग और सामाजिक विकास विभाग के साथ मिलकर फिलॉसफी यूनिवर्सिटी के अर्बन लाइवलीहुड सेंटर में महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स के लिए वेस्ट मैनेजमेंट और माइक्रो ग्रीन वेजिटेबल्स की खेती पर एक स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑर्गनाइज़ किया गया।

ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन पिछले दस सालों से अलग-अलग NGOs और महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स के ज़रिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम अच्छे से कर रहा है। सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स को सोशल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट से ऑफिशियली मान्यता मिली हुई है। उन्हें पहचान पत्र, बेल कार, क्लासिफिकेशन शेड वगैरह दिए जाते हैं। पर्यावरण अधिकारी वैशाली पालकर ने बताया कि इसके ज़रिए महिला कचरा इकट्ठा करने वालों को घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने, गीले और सूखे कचरे को अलग करने, गीले कचरे से खाद बनाने और लोगों में जागरूकता और ट्रेनिंग जैसे कई तरह के रोज़गार के मौके मिलते हैं।

पेरिस विकास भगिनी संस्था, स्त्री मुक्ति संगठन, एंटी प्लास्टिक ब्रिगेड, समर्थ भारत व्यासपीठ जैसे संगठन इस पहल में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में, महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप के ज़रिए पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने और कपड़े के बैग बनाने जैसे दूसरे एनवायरनमेंट फ्रेंडली काम भी किए जा सकते हैं।
इसके बाद, स्त्री मुक्ति संगठन की मुख्य कार्यकर्ता ज्योति म्हापसेकर ने अपने असरदार और आसान शब्दों और गानों के ज़रिए महिलाओं को उनके काम की अहमियत समझाई। उन्होंने महिलाओं को यह कहकर मोटिवेट किया कि परिवार और समाज के विकास के लिए महिलाओं का पैसा कमाना बहुत ज़रूरी है। पेरिस भगिनी विकास मंडल की कल्पना अंधारे ने वेस्ट मैनेजमेंट का महत्व समझाते हुए मौजूद महिलाओं को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करने की ज़रूरत और उसका सही तरीका समझाया। साथ ही, पेरिस भगिनी विकास मंडल की निर्मला सावंत ने दालों, अनाज और पिसे हुए अनाज से माइक्रो हरी सब्ज़ियां उगाने के बारे में डिटेल में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि घर पर सब्ज़ियां बनाकर परिवार को एनीमिया से बचाया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस खेती से महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप आसानी से इनकम का सोर्स बना सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा
