कानपुर, 10 फरवरी (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में हाल ही में पायनियर बैच कंटीन्यूइंग एजुकेशन सेंटर (पीबीसीईसी) में “पैदल यात्री गतिशीलता और सुरक्षा के लिए सेंसिंग एवं मॉडलिंग पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीएसएम-पीएमएस 2026)” का आयोजन किया गया।

दो दिवसीय इस सम्मेलन में देश-विदेश के शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा पैदल यात्री सुरक्षा और शहरी परिवहन से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों पर मंथन किया।

सिविल इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी कानपुर द्वारा आयोजित यह सम्मेलन स्पार्क-वित्तपोषित अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग परियोजना का हिस्सा था। जिसमें आईआईटी कानपुर और यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया की भागीदारी रही। सम्मेलन में उन्नत सेंसिंग तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और मॉडलिंग के माध्यम से पैदल यात्री पहचान, सुरक्षा आकलन, गतिशीलता व्यवहार और डेटा-आधारित शहरी परिवहन योजना जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
सम्मेलन का मुख्य वक्तव्य यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न के इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग विभाग के रेज़िलिएंस एवं मोबिलिटी के प्रिंसिपल रिसर्च फेलो प्रो. मिलाद हघानी ने दिया। उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर वाहनों के बढ़ते आकार से पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और इससे निपटने के लिए साक्ष्य-आधारित नीतियों की आवश्यकता है।
उद्घाटन सत्र में प्रो. सलिल गोयल ने स्वागत सम्बोधन दिया, जबकि आईआईटी कानपुर के डीन (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. तरुण गुप्ता ने डेटा-आधारित और तकनीक-सक्षम यातायात प्रबंधन पर जोर दिया। तकनीकी सत्रों में लिडार आधारित पैदल यात्री पहचान, डिजिटल ट्विन्स, मशीन लर्निंग और जियो स्पेशियल सुरक्षा विश्लेषण जैसे विषयों पर शोध प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन ने सुरक्षित और समावेशी शहरी गतिशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
