
मेदिनीपुर, 11 फरवरी (हि.स.)। मेदिनीपुर नगर आदिवासी खेरवाल संथाल समाज के तत्वावधान में बुधवार सुबह 10 बजे क्यूकोटा हेलिपैड प्रांगण में भारत के प्रथम आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बाबा तिलका मुर्मू (मांझी) उर्फ जबरा पहाड़िया की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर समाज के लोगों ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए “हुल साय जोहार” के उद्घोष लगाए।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि 11 फरवरी 1750 को बिहार के सुल्तानगंज में जन्मे बाबा तिलका मुर्मू ने ब्रिटिश शासन के अन्याय, शोषण और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका था। उनका आंदोलन केवल एक विद्रोह नहीं, बल्कि आदिवासी स्वाभिमान, अधिकार और अस्तित्व की रक्षा का ऐतिहासिक संघर्ष था।

वक्ताओं ने उनके साहस, नेतृत्व क्षमता और बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि बाबा तिलका मुर्मू का जीवन आज भी समाज को अन्याय के विरुद्ध संगठित होकर संघर्ष करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने अत्याचार के सामने कभी झुकने की बजाय अधिकारों की रक्षा के लिए अडिग रहने का संदेश दिया।
इस अवसर पर उपस्थित संथाल समाज लोगों ने उनके आदर्शों को आत्मसात करने तथा समाज की एकता, शिक्षा, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए सतत प्रयास करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन “जय बाबा तिलका मुर्मू” और “जय आदिवासी एकता” के नारों के साथ हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
