-बुढापे में बच्चे माता-पिता को ना दूर करें ना उनसे दूर हों

-गुरुग्राम के ओल्ड ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स में हो रही है श्रीशिव महापुराण कथा

गुरुग्राम, 16 फ़रवरी (हि.स.)। गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला वृंदावन के संचालक एवं विश्व प्रसिद्ध कथावाचक पुराण मनीषी परम पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि बेशक कितने ही मंदिर बनवा लो, अस्पताल बनवा लो। जब तक घर में बुजुर्गों का सम्मान नहीं होगा तो खुशियां और शांति नहीं मिलेगी। घर में बुजुर्गों से बड़ा कोई भगवान नहीं है। बुढ़ापे में बच्चे माता-पिता को दूर ना करें और ना खुद उनसे दूर हों। बुजुर्गों पर ध्यान नहीं दिया जाता, उनकी संभाल नहीं की जाती तो सब साधन व्यर्थ हैं।
प्रवक्ता अनिल शास्त्री ने बताया कि श्री कौशिक जी महाराज ने सोमवार को यहां ओल्ड जेल कॉम्पलेक्स में श्री शिवमहापुराण कथा एवं गोमहोत्सव के पांचवें दिन प्रवचनों में परिवार को जोडक़र रखने के साथ प्राकृतिक चीजों के इस्तेमाल का संदेश दिया। श्री कौशिक जी महाराज ने आगे कहा कि एक पिता जीवनभर मेहनत करके बूढ़ा हो जाता है। एक मां बच्चे के लिए अपना सौंदर्य खो देती है। जब औलाद उन्हें अपने से दूर करती है तो वह पीड़ा असहनीय होती है। आज की हकीकत यह है कि एक माता-पिता चार बच्चों को पाल लेते हैं, मगर एक माता-पिता को चार बच्चे मिलकर नहीं पाल पाते। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम संस्कारों की भूमि है। इस धरती पर हम सबको यह प्रण लेना चाहिए कि किसी परिवार में कोई बुजुर्ग दुखी ना हो। माता-पिता का सभी पूरा ध्यान रखें। माता-पिता से भरोसेमंद इस दुनिया में कोई नहीं है।
उन्होंने खान-पान के प्रति जागरुक करते हुए कहा कि ऐसा कोई शौक ना रखें जो हमारे जीवन के लिए हानिकारक हो। व्यक्ति को बढिय़ा मौसम में एक गन्ना रोजा चूसना चाहिए, पीलिया नहीं होगा। घर में मेहमान आएं तो उन्हें नींबू शिकंजी, लस्सी, नारियल पानी पिलाएं। गन्ने का रस पिलाएं, लेकिन कोका कोला ना पिलाएं। यह भारत में सबसे बड़ा व्यापार है मगर हमें बीमार बना रहा है। थोड़ा सा केमिकल डालकर ड्रम भर लिए जाते हैं। हम घर में मेहमान की इज्जत के नाम पर उसे जहर पिलाते हैं। कौशिक जी महाराज ने कहा कि जिस देश में नीम और नींबू होते हैं और वहां के लोग बीमार होते हैं तो अचंभा होता हे। भारत की माटी में बहुत जड़ी बूटियां हैं। यहां सोना चांदी भी है और औषधियां भी हैं, जो इस कलयुग में भी 100-125 साल मरने नहीं देंगी। पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि धोखे से, भूल से भी आराधना, साधना हो जाए तो कृपा अपरंपार है। उन्होंने महाराष्ट्र के सतारा के जंगल में महाबलेश्वर धाम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समुद्र कई किलोमीटर से चलकर आता है और महाबलेश्वर के चरणों को धोता है। उन्होंने कहा कि अपने भारत में करोड़ों शिवलिंग, शिवमंदिर हैं। सभी की एक से बढक़र एक महिमा है। उन्हीं में से एक हैं महाबलेश्वर। महाबलेश्वर सतयुग में सफेद रंग के होते थे। त्रेता में लाल, द्वापर में पीले और अब कलयुग में सांवले हो गए हैं। हर युग में इनका रंग बदलता है। जो इनके भक्तिपूर्वक दर्शन, पूजन करता है तो वह शिवस्वरूप हो जाता है। कौशिक जी महाराज ने कहा कि यह पूरे ब्रह्मांड का इकलौता मंदिर है, जहां अनेक देवात चौकीदारी करते हैं। महाबल का दर्शन करने का मतलब मोक्ष का द्वार खुल जाना है। बच्चों की शादियों को लेकर श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि 21 से 25 साल की उम्र में बच्चों की शादी का समय शास्त्रों के अनुकूल है। दो-तीन और बढ़ा लें और 28 साल तक शादी कर लें। इससे ज्यादा समय सही नहीं। आज परेशानियों में उलझे युवा शादी करने में देरी कर रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर
