-विवेक शुक्ला

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीती 13 फरवरी को राजधानी में सेवा तीर्थ का उद्घाटन किया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) साउथ ब्लॉक से अब सेवा तीर्थ में शिफ्ट कर गया। दरअसल, राजधानी दिल्ली आज आधुनिकता और परंपरा के अनोखे मिश्रण का प्रतीक बन रही है। केन्द्र में साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के आने के बाद राजधानी के सेंट्रल विस्टा में बड़े पैमाने पर विकास कार्य शुरू हो गए। सेंट्रल विस्टा री-डवलपमेंट प्रोजेक्ट 2019 में शुरू हुए थे और इसके साल 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इस परियोजना के तहत संसद का नया भवन, सेवा तीर्थ (नया प्रधानमंत्री कार्यालय), कर्तव्य भवन और कई अन्य इमारतें बनी हैं। ये निर्माण न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए हैं बल्कि इनमें वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों का भी व्यापक उपयोग किया गया है, जो भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़े हैं।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की शुरुआत इसलिए की गई क्योंकि पुरानी इमारतें बदलती हुई जरूरतों के लिहाज से अपर्याप्त
हैं। पुराना संसद भवन, जो साल 1927 में बना था, अब सांसदों की बढ़ती
संख्या और आधुनिक आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त हो गया था। इसलिए, संसद के नये भवन
का निर्माण किया गया, जिसका उद्घाटन 28 मई 2023 को किया गया। यह इमारत 64,500 वर्गमीटर में फैली है और त्रिकोणीय आकार की है, जो वास्तुशास्त्र में ‘अग्नि
तत्व’ का प्रतीक मानी जाती है। प्रख्यात वास्तु शास्त्री डॉ. जयप्रकाश शर्मा लालधागेवाले बताते हैं कि अग्नि तत्व ऊर्जा, शक्ति और सकारात्मकता का प्रतीक है, जो संसद और
सेवा तीर्थ जैसे महत्वपूर्ण स्थानों के लिए उपयुक्त है। डॉ. लालधागेवाले भी इन इमारतों के निर्माण में सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं। वास्तु के अनुसार, त्रिकोणीय
डिजाइन भवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सुनिश्चित करता है, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत बनाता है।
संसद के नये भवन में छह मुख्य द्वार हैं: गज द्वार, अश्व
द्वार, गरुड़ द्वार, मकर द्वार, शार्दुल द्वार और हंस द्वार। ये सभी वास्तुशास्त्र से प्रेरित हैं और भारतीय संस्कृति के
प्रतीकों को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, गज द्वार उत्तर दिशा में है, जो वास्तु में बुध ग्रह से जुड़ा है और बुद्धि का स्रोत माना जाता है। हाथी (गज) समृद्धि और
खुशी का प्रतीक है। इसी तरह, पूर्व दिशा में अश्व द्वार सूर्योदय से जुड़ा है, जो विजय का प्रतीक है। गरुड़ द्वार उत्तर-पूर्व में है, जो ज्ञान और विवेक का प्रतिनिधित्व करता है। ये द्वार न केवल सौंदर्य बढ़ाते हैं बल्कि वास्तु के अनुसार भवन में संतुलन बनाए रखते हैं। भवन के अंदर लगभग 5,000 कलाकृतियां हैं, जो 5,000 वर्षों की
भारतीय सभ्यता को दर्शाती हैं और वास्तु तथा सनातन परंपरा पर आधारित हैं। डिजाइनरों
ने ब्रह्मेश्वर मंदिर से प्रेरणा ली है, जो तांत्रिक यंत्र पर आधारित है, हालांकि कुछ
विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तु की गहन समझ की कमी हो सकती है।
सेवा तीर्थ सेंट्रल विस्टा का
महत्वपूर्ण हिस्सा है और साउथ ब्लॉक के पास 15 एकड़ में फैला है। सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री
कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय एक ही जगह पर हैं। इसका नाम ‘सेवा तीर्थ’ इसलिए रखा गया है क्योंकि यह ‘नागरिक देवो भव’ की
भावना को दर्शाता है,
जहां सेवा को तीर्थ के समान पवित्र माना गया है। वास्तु के संदर्भ में, इसका
डिजाइन प्रकृति से जुड़ी है, जिसमें ऊर्जा संरक्षण और सकारात्मक
प्रवाह पर जोर है। यह इमारत आधुनिक बुनियादी ढांचे से सुसज्जित है लेकिन
वास्तु सिद्धांतों का पालन करती है, जैसे दिशाओं का संतुलन और प्राकृतिक
तत्वों का समावेश।
सेवा तीर्थ के अलावा कर्तव्य भवन
1 और 2 का भी
उद्घाटन हो चुका। ये कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) के हिस्से हैं, जो
कुल 10 इमारतों
की योजना में पहले हैं। कर्तव्य भवन में गृह, विदेश, ग्रामीण
विकास जैसे मंत्रालय हैं। नामचीन आर्किटेक्ट उज्ज्वल उपाध्याय कहते हैं कि ये
सभी इमारतें पर्यावरण अनुकूल हैं। ये 30 फीसदी ऊर्जा
बचत करती हैं और सौर ऊर्जा से 5.34 लाख यूनिट बिजली पैदा करती हैं।
सेंट्रल विस्टा में कई अन्य इमारतों का
निर्माण चल रहा है। राजपथ को कर्तव्य पथ में बदलना भी इसी परियोजना का हिस्सा है, जो 3 किमी लंबा
है और पैदल यात्री अनुकूल है।
मोदी सरकार के तहत ये निर्माण न केवल
बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हैं, बल्कि वास्तुशास्त्र को आधुनिक
संदर्भ में अपनाते हैं। वास्तु भवनों
को प्रकृति से जोड़ता है। मोदी युग में स्मार्ट सिटी और गेटेड कम्युनिटीज
में वास्तु का उपयोग बढ़ा है, जो स्थिरता और जीवन गुणवत्ता को
बढ़ाता है। उदाहरण के लिए,
नई इमारतों में उत्तर-पूर्व दिशा को महत्व दिया गया है, जो ज्ञान का
प्रतीक है। ये परियोजनाएं पर्यावरण संरक्षण पर जोर देती हैं, जैसे पानी
और ऊर्जा का कुशल उपयोग,
जो वास्तु के सतत विकास के सिद्धांत से मेल खाता है।
ये इमारतें भारतीय इतिहास को भी
सम्मान देती हैं। पुराने नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को संग्रहालय में बदलना योजना है, जो
सांस्कृतिक विरासत को बचाता है। कुल मिलाकर, 20,000 करोड़ की यह परियोजना प्रशासन
को एकीकृत करती है और वास्तु के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। मोदी
सरकार ने 8 प्रमुख
प्लॉट्स का भूमि उपयोग बदला है, जो विकास को गति देता है।
दिल्ली में नया संसद भवन, सेवा तीर्थ
और अन्य इमारतें मोदी युग की उपलब्धियां हैं, जो आधुनिकता और वास्तुशास्त्र का
सुंदर संगम हैं। ये न केवल कार्यक्षमता बढ़ाती हैं बल्कि
भारतीय संस्कृति को जीवंत रखती हैं। भविष्य में ये इमारतें ‘विकसित भारत’ की नींव
बनेंगी, जहां
परंपरा और प्रगति साथ चलेंगी।
(लेखक, जाने-माने पत्रकार और स्तंभकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश
