प्रयागराज, 21 फ़रवरी (हि.स.)। हिंदी को रोमन लिपि में लिखना संविधान विरोधी कदम है। संविधान में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि हिंदी देवनागरी लिपि में लिखी जाएगी। उक्त बातें शनिवार को प्रयागराज के सर्वार्य महाविद्यालय इंटर कालेज में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए गोष्ठी संयोजक एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद काशी प्रांत के संरक्षक डॉ मुरार जी त्रिपाठी ने कही।

उन्होंने कहा कि रोमन में हिंदी लिखने से मातृभाषा एवं राष्ट्रभाषा हिंदी का मौलिक स्वरूप क्षत विक्षत हो रहा है। हम सभी को मातृभाषा दिवस पर इस विकृति को रोकने के लिए संकल्प लेना होगा।

संयोजक डाँ त्रिपाठी ने हिंदी के मौलिक स्वरूप को बचाने के लिए सभी डिजिटल माध्यमों में देवनागरी लिपि के आधिकारिक प्रयोग की जरूरत पर बल दिया।
वरिष्ठ समाजसेवी केशव नगर के संघ चालक राजेंद्र मिश्र ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं वरन संस्कृति एवं राष्ट्रीय एकता की संवाहक भी होती है। भाषा के विकृत होने से संस्कृति विकृत होगी। इसे बचाने के लिए सबको आगे आना होगा। हिंदी को रोमन में लिखा जाना अत्यंत दुर्भाग्य जनक है।
विशिष्ट वक्ता एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के हिंदी शिक्षक हेमराज ने कहा कि हमारी मातृभाषा हिंदी आज भी न्यायालय की भाषा नहीं बन सकी है। चीन रूस अमेरिका सभी अपनी भाषाओं में कार्य करते हैं केवल भारत में अंग्रेजी का वर्चस्व स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी बना हुआ है। हम सभी को अंग्रेजी का व्यामोह छोड़ना होगा। इसके लिए अधिकाधिक देवनागरी लिपि का प्रयोग अपने दैनिक जीवन में करना होगा।
इसी कॉलेज के शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता रवींद्र मिश्र एवं प्रवीण तिवारी एडवोकेट ने भी राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए मातृभाषा हिंदी को सशक्त बनाने की मांग की।
सर्वार्य इंटर कॉलेज के शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता अंकित जायसवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। गणित शिक्षक विमल कुमार पांडे ने विषय प्रवर्तन करते हुए गोष्ठी का सफल संचालन किया। इस दाैरान आशुतोष सिंह, विकास कुमार, गुड़िया यादव, रूपेश पांडे समेत बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल
