जयपुर, 24 फ़रवरी (हि.स.)। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) 25 फरवरी को देशव्यापी विरोध दिवस मनाएगा। पुरी में आयोजित संगठन के 21 वें अखिल भारतीय अधिवेशन में लिए गए निर्णय के अनुसार बीएमएस की सभी इकाइयों जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन कर केंद्र और राज्य सरकारों से श्रमिकों की लंबित समस्याओं के समाधान की मांग करेंगी।

बीएमएस के प्रचार मंत्री अक्षय कुमार मीणा ने बताया कि श्रमिक हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे समय-समय पर सरकार के सामने रखे गए, लेकिन अब तक अपेक्षित सकारात्मक और ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों मिड-डे मील और आशा कार्यकर्ता बहुत कम मानदेय पर काम कर रही हैं। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को लगभग पाँच दशकों की सेवा के बावजूद ‘योजना कर्मी’ का दर्जा दिया जा रहा है, जबकि उनसे प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक कार्य लिया जा रहा है और लगातार नई जिम्मेदारियां भी दी जा रही हैं।

मीणा ने बताया कि आठ राज्यों में राष्ट्रीय वस्त्र निगम (एनटीसी) की मिलों के श्रमिकों को महामारी के बाद से केवल 50 प्रतिशत वेतन मिल रहा है और पिछले दस महीनों से वेतन बकाया है। इसी तरह हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) के कर्मचारियों को पिछले 32 महीनों से वेतन नहीं मिला है। विद्युत क्षेत्र के कर्मचारी डिस्कॉम के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं, जबकि बैंक कर्मचारी पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
इसके अलावा ईपीएस-95 के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये ही बने रहने से पेंशनभोगियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बीएमएस के अनुसार इन परिस्थितियों को देखते हुए संगठन की इकाइयाँ देशभर में धरना, प्रदर्शन, रैली, गेट मीटिंग और काली पट्टी धारण कर विरोध दर्ज कराएंगी। साथ ही प्रधानमंत्री, केंद्रीय श्रम मंत्री और संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश
