मुंबई, 26 फरवरी (हि.स.)। महाराष्ट्र में नदियों की बाढ़ की लाइनों के बारे में रेड व ब्लू लाइन तय करने का प्रोसेस पूरी तरह से डिजिटल और साइंटिफिक तरीके से किया जा रहा है। यह किसी इंसानी अंदाजे पर आधारित नहीं है। अकोला जिले की मोरना नदी के बाढ़ लाइन का आईआईटी मुंबई की ओर से नया सर्वे कराया जाएगा। यह जानकारी गुरुवार को विधान परिषद में जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने दी।

यह जानकारी जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने गुरुवार को विधान परिषद में दी। सदन में वसंत खंडेलवाल व अन्य सदस्यों ने ध्यानाकर्षण सूचना के तहत अकोला शहर से होकर बहने वाली मोरना नदी की रेड और ब्लू लाइन के बारे में सवाल पूछा था। इसके जवाब में मंत्री महाजन ने कहा कि अकोला से मिली आपत्तियों और सुझावों के बाद, इन बाढ़ की लाइनों पर फिर से विचार करने का फैसला किया गया है। यह काम आईआईटी मुंबई को सौंपा गया है। आईआईटी मुंबई पिछले 25 और 100 वर्षो में बाढ़ की स्थिति की पूरी व तकनीकी अध्ययन करने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट देगा। महाजन ने कहा कि संबंधित रिपोर्ट के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

मंत्री महाजन ने कहा कि फ्लड लाइन भविष्य में जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए तय की जाती हैं। ब्लू लाइन 25 साल में एक बार आने वाली संभावित बाढ़ के लेवल पर आधारित होती है। रेड लाइन 100 साल में आने वाली संभावित बाढ़ और बांध से छोड़े जाने वाले पानी को ध्यान में रखकर तय की जाती है। उन्होंने बताया कि संबंधित सर्वे पूरा होने के बाद, स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्यवाही की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार
