कोलकाता, 27 फरवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के बाहर कथित रूप से हुए दुर्व्यवहार के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने कोलकाता पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने राज्य पुलिस को निर्देश दिया कि वह पांच मार्च तक इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। यह आदेश शुभेंदु अधिकारी द्वारा दायर याचिका पर दिया गया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि मंगलवार को सीईओ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा उनके साथ की गई कथित हूटिंग और अभद्र व्यवहार को रोकने में शहर पुलिस ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।

अदालत ने कोलकाता पुलिस को यह भी बताने को कहा है कि संबंधित बीएलओ के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। मामले की अगली सुनवाई पांच मार्च को निर्धारित की गई है।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को केंद्रीय कोलकाता स्थित सीईओ कार्यालय के बाहर उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जब शुभेंदु अधिकारी ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे। उसी दौरान प्रदर्शन कर रहे कुछ बीएलओ ने कथित रूप से उनके खिलाफ नारेबाजी की और कुछ लोगों को उनकी ओर जूते उछालते हुए भी देखा गया। घटना के बाद अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों की कड़ी आलोचना करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की थी।
नेता प्रतिपक्ष की सुरक्षा को लेकर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पहले से ही मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष लंबित है। इस पीआईएल में मांग की गई है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों या आधिकारिक बैठकों के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों को नेता प्रतिपक्ष के निकट आने से रोका जाए, ताकि किसी प्रकार की सुरक्षा चूक न हो।
इसके अतिरिक्त, शुभेंदु अधिकारी ने हाल की इस घटना को लेकर नई याचिका दायर कर सुरक्षा व्यवस्था में कथित चूक पर विशेष आपत्ति जताई है।
इससे पहले पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोणा में उनके काफिले पर कथित हमले के मामले में भी शुभेंदु अधिकारी ने हाईकोर्ट का रुख किया था। उस प्रकरण में उन्होंने अदालत को बताया था कि हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने उनके ही खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
बाद में न्यायमूर्ति सुव्रा घोष ने उस मामले में अंतरिम आदेश पारित करते हुए शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
