सासाराम (रोहतास) गीताघाट वेदाश्रम सासाराम में योग शिविर के छठे दिन रविवार को स्वामी अशोकानंद जी महाराज उर्फ अमृत प्रकाश जी (भागवत व्यास)आनंदधाम ऋषिकेश) ने शिविर में बताया कि योगासन से पापों का प्रायश्चित होता है। 84 लाख योनियों के 84 आसन है। यदि प्रभु नाम का स्मरण करते हुए आसनों को किया जाता है तो वह सभी पाप खत्म हो जाते हैं जिससे शरीर में रोग उत्पन्न हो जाते हैं। परम पूज्य बाबा जी कहते हैं यदि आसन और संयम के साथ रहा जाए तो तन और मन के रोग नष्ट हो जाते हैं। केवल भोग शेष रह जाता है। जिससे सहन करने की क्षमता मिल जाती है। रविवार के दिन भागवत कथा में बताया गया कि किस प्रकार फल को समर्पित करने वाली मां का उद्धार किया और यह संकेत दिया कि कर्म और कर्म के फलों को समर्पित करने वाला मुक्त हो जाता है और कर्मफल में आसक्त रहने वाला बंधन में बंध जाता है। इसलिए परम पूज्य बाबा जी कहा करते थे करते कर्म करो विधि नाना। मन राखो जहँ कृपा निधाना। भगवान की विचित्र विचित्र लीलाओं को देखकर असुर तो मोहित होते ही है कभी-कभी देवता भी मोहित हो जाते हैं। उन्हें लीला में से एक लीला से ब्रह्मा जी मोहित हो गए और भगवान की परीक्षा ले बैठे। जबकि भगवान और गुरु को अधिकार है भक्त और शिष्य की परीक्षा लेने का और भक्तों और शिष्यों को अधिकार नहीं है भगवान या गुरु की परीक्षा लेने का। इसी लीला में बताया गया कि भगवान स्वयं ही ग्वाल बाल गैया बछड़े लाठी बांसुरी सब बन गए, यहां भगवान सर्वम ब्रह्म को सिद्ध कर रहे थे। इसके उपरांत 56 भोगों से गोवर्धन भगवान की पूजा की गई। अपने-अपने घरों से माताएं बड़े उत्साह से भोग बनाकर लाई थी। गोवर्धन लीला के माध्यम से भगवान ने देवराज इंद्र के अनुमान का हनन किया। आज श्रीमद् भागवत की कथा में गोपियों के प्रेम का आध्यात्मिक तथ्य बताया गया तथा महारास का भी आध्यात्मिक का अर्थ बताया गया।स्वामी अमरेंद्रानंद जी (द्वारिका गुजरात), स्वामी अवतारानंद जी उर्फ नागा बाबा, स्वामी कमलानंद जी, स्वामी भरत भूषणानंद जी, स्वामी अर्जुनानन्द जी, स्वामी शंकरानन्द जी ने अपने विचार प्रकट किए।

