

खड़गपुर, 02 मार्च (हि.स.)। पश्चिम बंगाल का ‘छोटा भारत’ कहे जाने वाला औद्योगिक शहर खड़गपुर इन दिनों रंगों के महापर्व होली और गौरांग महाप्रभु की परंपरा ‘दोल उत्सव’ की तैयारियों में पूरी तरह सराबोर है। 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के समापन और वसंत ऋतु के आगमन के साथ शहर के बाजारों में विशेष चहल-पहल देखी जा रही है। प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों से लेकर देवालयों तक उत्सव का उल्लास स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता है।

गोल बाजार, गेट बाजार, नया बाजार, निमपुरा बाजार, इंदा बाजार तथा खरीदा बाजार में सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। सोमवार सुबह गेट बाजार में रंगों की दुकान लगाने वाले स्थानीय व्यवसायी सुमित सोनकर ने बताया कि 12वीं की परीक्षा समाप्त होते ही बाजार में काफी तेजी आई है। युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से अबीर-गुलाल, पिचकारी और अन्य सामग्रियों की बिक्री में वृद्धि हुई है।

खरीदा बाजार के रंग विक्रेता पवन गुप्ता के अनुसार, इस वर्ष गेरुआ रंग की मांग में विशेष बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पारंपरिक लाल, गुलाबी, पीले और हरे रंगों के साथ सांस्कृतिक प्रतीक रंगों की ओर भी लोगों का रुझान बढ़ा है।
तिरंगे के रंगों वाली पिचकारियां और हर्बल गुलाल भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के अवसर पर बाजार समाज की सांस्कृतिक और वैचारिक भावनाओं का प्रतिबिंब बन जाते हैं।
उधर, त्योहार को शांतिपूर्ण एवं मर्यादित ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से हाल ही में प्रेमहरी भवन में प्रशासन की ओर से शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों, क्लबों और नागरिक प्रतिनिधियों को अनुशासित एवं सीमाबद्ध तरीके से उत्सव मनाने का निर्देश दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हुड़दंग अथवा अमर्यादित आचरण पर कड़ी नजर रखी जाएगी तथा कानून-व्यवस्था से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
‘मंदिरों का शहर’ कहे जाने वाले खड़गपुर में विभिन्न देवालयों में विशेष सजावट की जा रही है। दोल पूर्णिमा के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के विग्रहों का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। शहर के मध्य स्थित मारवाड़ी समाज द्वारा संचालित खाटू श्याम मंदिर में भी भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रसाद वितरण की तैयारियां चल रही हैं। शहर में पांच बड़े शिव मंदिरों में भी सजावट का कार्य जारी है।
बंगाली समाज की परंपरा के अनुसार, गुरुजनों एवं बड़ों के चरणों में अबीर अर्पित कर आशीर्वाद लेने की परंपरा निभाई जाएगी।
इस वर्ष चार मार्च को रंगोत्सव के साथ होली मनाई जाएगी। विभिन्न भाषाओं, प्रांतों और संस्कृतियों के संगम वाले इस शहर में होली का पर्व राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
2016 से लगातार भाजपा के पूर्व सांसद दिलीप घोष खड़गपुर में ही अपने समर्थकों के साथ होली मनाते रहे हैं। इस बार भी उनकी उपस्थिति की संभावना जताई जा रही है। तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने भी होली को सामाजिक सद्भाव और जनसंपर्क का महत्वपूर्ण अवसर बताया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
