उज्जैन, 03 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में मंगलवार शाम को चंद्र ग्रहण के बाद भगवान महाकाल को स्नान कराया गया और पूरे मंदिर परिसर को धाया गया।

महाकालेश्वर मंदिर के शासकीय पुजारी पं.घनश्याम शर्मा ने बताया कि चंद्रग्रहण का वेद काल मंगलवार प्रात: सूर्योदय से प्रारंभ हो गया था। वेद काल के कारण प्रात: की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया गया। ग्रहण समाप्त होने के पश्चात मंदिर में शुद्धिकरण किया गया। भगवान को स्नान करवाया गया और भगवान को पूजन पश्चात भोग अर्पित कर संध्या आरती की गई। इस दौरान मंदिर गर्भगृह के पट खुले रहे लेकिन प्रवेश पूर्णत: प्रतिबंधित रहा। पूरे परिसर में गुलाल-रंग पर भी प्रतिबंध रहा जोकि धुलेेंडी पर्व पर बुधवार को भी रहेगा।

बुधवार से ठण्डे जल से स्नान प्रारंभ करेंगे बाबा महाकालबाबा महाकाल को बुधवार तडक़े भस्मार्ती के दौरान ठण्डे जल से स्नान प्रारंभ करवाया जाएगा। पं.घनश्याम शर्मा ने बताया कि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से परंपरानुसार ग्रीष्म की शुरूआत मानी जाती है और भगवान को ठण्डे जल से स्नान प्रारंभ करवाया जाता है। अब यह क्रम शरद पूर्णिमा तक चलेगा। उसके बाद शीत ऋतु का आगमन माना जाता है,ऐसे में गर्म जल से भगवान को स्नान प्रारंभ करवाया जाता है। परंपरानुसार चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से भगवान की तीन आरतियों के क्रम में बदलाव होता है। अब बुधवार से आरतियों का क्रम बदल जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल
