मथुरा, 04 मार्च(हि.स.)। बछगांव गांव में ’चप्पल’ होली मनाई जाती है। स्थानीय निवासी योगेश कुंतल ने बताया कि यह एक-दूसरे के प्रति बिना किसी द्वेष के खेलने की परंपरा है। एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि 150 साल पुरानी यह परंपरा कभी अंग्रेजों के अत्याचारों का विरोध करने के लिए शुरू की गई थी, इस दौरान हुरियारे गुलाल उड़ाए जाते हैं और होली के गीतों पर नृत्य भी किया जाता है।

गोवर्धन तहसील के गांव बछगांव में विगत सैकड़ों वर्षों से जूता-चप्पल मारकर होली मनाने की पंरपरा है। इस होली में एक खास बात ये भी कि अपने छोटे लोगों को जूता-चप्पल मारकर होली की शुभकामनाओं के साथ आशीर्वाद दिया गया। सकारात्मक विचारों और सही दिशा के लिए अग्रसर होने के लिए जागरूक किया गया। इसके बाद बुजुर्ग होली, बृजगीत, रसिया समेत अन्य प्रकार की गीतों के सहारे भजन कीर्तन करते है। इस प्रकार ब्रज में बछगांव में होली की अद्भूत परपंरा है। जहां जूता चप्पल मार होली खेली गई। यहां की होली शांतिपूर्ण तरीके से मनाई गई।

150 वर्ष पुरानी है परपंरा
गांव बछगांव में जूता-चप्पल मार होली खेलने की परपंरा 100-150 वर्ष पुरानी है। अंग्रेजों द्वारा किए गए जुल्म के विरोध में जूता-चप्पल मार होली खेली गई। धुलंडी के दिन सुबह से शाम तक सभी लोग इसी प्रकार होली खेलते है। इसके बाद बुजुर्गो द्वारा फाल्गुन के रसियों पर थिरकते नजर आते है।
हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार
