-डॉ. श्रेयोषी सिन्हा/ अबू ओबैधा अरिन

बांग्लादेश में अंतरिम सरकार की अगुवाई करने वाले मुहम्मद यूनुस की इससे पहले ग्रामीण बैंक मिशन को लेकर वैश्विक प्रशंसा होती रही है लेकिन उनके साम्राज्य के पीछे की वित्तीय संरचना पर गहराई से नज़र डालने पर जटिल और गंभीर रूप से चिंताजनक कहानी सामने आती है। जहाँ दुनिया ने उन्हें सूक्ष्म ऋण (माइक्रोक्रेडिट) का अग्रदूत माना, वहीं उपलब्ध आँकड़े व्यक्तिगत और संस्थागत संपत्ति के चौंकाने वाले संचय की ओर संकेत करते हैं, जो ग्रामीण बैंक मिशन की उनकी सादगीपूर्ण शुरुआत से तीव्र विरोधाभास दर्शाते हैं।
लोकसेवक से अरबों-टका खातों तक
अक्सर भुला दिया जाता है कि ग्रामीण बैंक कार्यक्रम की शुरुआत बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद भूमिहीन लोगों के लिए बिना जमानत ऋण उपलब्ध करवाने की पहल के रूप में हुई थी। संविधान के अनुच्छेद 152 के अंतर्गत इसे एक वैधानिक सरकारी प्राधिकरण के रूप में स्थापित किया गया था। महत्वपूर्ण बात यह है कि बैंक की शुरुआत पूरी तरह सरकारी धन से हुई थी और 1983 में ग्रामीण बैंक अध्यादेश जारी किया गया। जब डॉ. यूनुस ने 1990 में प्रबंध निदेशक का पद संभाला, तब उनका आधिकारिक वेतन मात्र 6,000 टका था। हालांकि, साल 2013 तक वित्तीय परिदृश्य में नाटकीय परिवर्तन आ चुका था। उनके निजी बैंक खातों में 118 करोड़ टका पाए गए।
विविध जमापूंजी: विशेष खातों में स्टैंडर्ड चार्टर्ड (18121274701), साउथ ईस्ट बैंक (0212100020061) और रूपाली बैंक (0489010008096) शामिल थे।
ट्रस्ट नेटवर्क: द प्रोफेसर यूनुस ट्रस्ट और फैमिली ट्रस्ट में कुल मिलाकर 77 करोड़ टका थे।
बड़ी राशि: सबसे चौंकाने वाली राशि ग्रामीण कल्याण और ग्रामीण टेलीकॉम फंड में थी, जिनमें क्रमशः 2,253 करोड़ और 2,721 करोड़ टका विभिन्न सावधि जमा रसीदों (FDRs) में रखे गए थे।
विलासिता और भूमि का विशाल पोर्टफोलियो
यूनुस की वित्तीय कहानी केवल नकद संपत्तियों तक सीमित नहीं है; यह विशाल अचल संपत्ति वाले साम्राज्य की भी कहानी है। ग्रामीण गरीबी पर ध्यान केंद्रित करने के दावों के बावजूद उच्च-स्तरीय शहरी और रिसॉर्ट संपत्तियों में महत्वपूर्ण निवेश किए गए। इन संपत्तियों पर नजर डालें-
लक्ज़री निवास: फैमिली ट्रस्ट के नाम पर गुलशन में 9 करोड़ टका का एक फ्लैट खरीदा गया, साथ ही पेरिस में एक और विलासितापूर्ण निवेश किया गया।
रिसॉर्ट और भूमि: “निर्झर” रिसॉर्ट ब्रांड ने पूर्बाचल में 4,080 कट्ठा और कॉक्स बाज़ार में एक अन्य स्थान पर भूमि पर कब्ज़ा किया हुआ है।
टूटे वादे: 2015 में चट्टोग्राम में “आनंद स्कूल” खोलने के लिए ग्रामीण कल्याण फंड को 87 कट्ठा सरकारी भूमि दी गई थी। हालांकि, स्कूल कभी नहीं बना और भूमि का सार्वजनिक कल्याण के लिए उपयोग कभी नहीं हुआ।
पूरे बांग्लादेश में अनुमान है कि ग्रामीण लोगों की सेवा के नाम पर 6,000 करोड़ टका मूल्य की भूमि खरीदी गई, जिसका बड़ा हिस्सा अब कथित रूप से पूंजी को विदेश ले जाने के लिए बेचा जा रहा है।
धन-निकासी की वैश्विक रणनीति
इस कहानी का सबसे परिष्कृत पहलू शायद ग्रामीण नाम का उपयोग करके वैश्विक व्यापार करना है, जबकि इस बैंक को ही किनारे रखा गया। बताया जाता है कि डॉ. यूनुस ने ग्रामीण ब्रांड का उपयोग यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका में सामाजिक व्यवसायों में निवेश के लिए किया। हालांकि, इन कंपनियों की घरेलू वास्तविकता निराशाजनक बताई गई। विदेश से आया पैसा, विभिन्न कंपनियों को चलाने में इस्तेमाल हुआ लेकिन उन कंपनियों ने कभी लाभ नहीं देखा। कंपनियाँ हमेशा घाटा दिखाती रहीं और पैसों की हेराफेरी की जाती रही।
इसके अतिरिक्त, इन संस्थाओं के प्रबंधन पर श्रम और कर कानूनों के व्यवस्थित उल्लंघन के आरोप हैं। कानून के अनुसार 5% लाभ श्रमिक कल्याण निधि में जमा करना आवश्यक था लेकिन कथित रूप से इन भुगतानों की अनदेखी की गई। इसके बजाय, लाभ विदेश भेजे गए और सरकार को फर्जी कर दिए गए, जिससे उन्हीं लोगों को वंचित किया गया जिन्हें ग्रामीण मॉडल के माध्यम से सशक्त बनाने का दावा किया गया था।
1990 के 6,000 टका वेतन पाने वाले प्रबंधक और आज के अरबों टका के धनकुबेर के बीच का यह विरोधाभास एक मौलिक प्रश्न उठाता है कि क्या “गरीबों के बैंकर” वास्तव में भूमिहीनों के लिए सुरक्षा जाल बना रहे थे या अपने लिए वित्तीय किला खड़ा कर रहे थे?
(डॉ. श्रेयोषी सिन्हा भारतीय वायुसेना के Centre for Air Power Studies में रिसर्च फेलो और अबू ओबैधा अरिन दिल्ली विवि में अध्ययनरत बांग्लादेश के छात्र हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश
