पश्चिमी सिंहभूम, 09 मार्च (हि.स.)। जिले के चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में नवजात शिशु के शव को गत्ते के डिब्बे में ले जाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच का आदेश दिया है। उपायुक्त ने सोमवार को मामले की जांच चक्रधरपुर की अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को सौंप दिया है।

जांच की जिम्मेदारी मिलने के बाद एसडीओ श्रुति राजलक्ष्मी चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल पहुंचीं और मामले से जुड़े डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों से पूछताछ किया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की। एसडीओ ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया है और जांच पूरी कर रिपोर्ट उपायुक्त को सौंप दी जाएगी।
बताया जा रहा है कि कराईकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव निवासी रामकृष्ण हेम्ब्रम अपनी पत्नी रीता तिरिया को प्रसव के लिए शनिवार को चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल लेकर गए थे। प्रसव के बाद कुछ ही देर में नवजात की मौत हो गई। इसके बाद पिता रामकृष्ण हेम्ब्रम अपने मृत नवजात के शव को गत्ते के डिब्बे में रखकर गांव ले गए थे। मामला सामने आने के बाद परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल की ओर से शव को घर तक ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई।
इस घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। डॉक्टरों ने जांच के दौरान एसडीओ को बताया कि महिला रीता तिरिया पहले से ही कई बीमारियों से ग्रसित थी और उसने मृत बच्चे को जन्म दिया था। वहीं, यह भी कहा गया कि परिजनों की ओर से शव ले जाने के लिए ममता वाहन या एंबुलेंस की मांग नहीं की गई थी।
हालांकि इस तर्क पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि परिजनों ने मांग नहीं भी की थी, तब भी अस्पताल प्रबंधन को खुद पहल कर शव को घर पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए थी। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि संभवतः जानकारी के अभाव में परिजन नवजात के शव को गत्ते के डिब्बे में लेकर चले गए। अस्पताल प्रबंधन ने यह भी दावा किया कि अगले दिन महिला को छुट्टी देने के समय सभी जरूरी व्यवस्था कर दी गई थीं, लेकिन जांच के दौरान वे यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि छुट्टी के समय मरीज को कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं।
एसडीओ ने बताया कि जांच प्रक्रिया के तहत पीड़ित परिवार का भी पक्ष लिया जाएगा, जिसके बाद पूरी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक
